किसानों की समस्याओं को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर अखिल भारतीय किसान सभा के सदस्यों ने रोष प्रदर्शन किया और डीसी रोहतक के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो 19 नवंबर को बड़े स्तर पर दोबारा प्रदर्शन किया जाएगा।
अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य कमेटी सदस्य प्रीत सिंह ने बताया कि जिले में हुए जलभराव की निकासी का सरकार ने कोई ठोस प्रबंध नहीं किया और किसानों को नुकसान का मुआवजा अब तक नहीं मिला। प्रशासन की लापरवाही के कारण किसानों के खेतों में पानी भरा हुआ है और फसलें बर्बाद हो रही हैं।
प्रीत सिंह ने आरोप लगाया कि ड्रेनों की सफाई के लिए बजट तो आवंटित किया गया था, लेकिन वास्तव में कोई काम नहीं हुआ। दीवाली के समय सीएम नायब सिंह सैनी ने वादा किया था कि किसानों की खुशहाली के लिए कदम उठाए जाएंगे, लेकिन आज तक मुआवजा नहीं मिला। उन्होंने बताया कि जिले के 62 लाख एकड़ में फसलों को नुकसान हुआ है।
अखिल भारतीय किसान सभा के जिला कोषाध्यक्ष बलवान सिंह ने कहा कि महम और सांपला के गांवों में खेतों में अभी भी पानी भरा हुआ है। प्रशासन के पास पानी निकासी के लिए पर्याप्त मोटर और पंप नहीं हैं। कहीं बिजली का कनेक्शन नहीं है तो कहीं डीजल की कमी है। प्रशासन की यह लापरवाही किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

बलवान सिंह ने धान की सरकारी खरीद में हुए घोटाले की भी बात उठाई। उन्होंने कहा कि जिन किसानों की फसल मंडियों में पहुंची, उनका भुगतान जी फार्म में 2,379 रुपए दिखाया गया जबकि उन्हें केवल 1,700 से 2,000 रुपए ही मिले। यह घोटाला शासन और प्रशासन की मिलीभगत को दर्शाता है।
पूर्व फौजी बलबीर सिंह ने कहा कि भविष्य में किसानों की फसलों को बचाने के लिए स्थायी जल निकासी का प्रबंध होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि नाले बनाकर या पाइप दबाकर खेतों से पानी निकासी सुनिश्चित की जाए। बड़े पाइप लगाने के लिए किसानों को कोई आपत्ति नहीं होगी, लेकिन इसके लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।
किसानों का कहना है कि यदि सरकार ने तुरंत उपाय नहीं किए, तो उनकी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगी और किसान खेती छोड़ने को मजबूर होंगे। संयुक्त किसान मोर्चा और अखिल भारतीय किसान सभा इस मामले में लगातार प्रशासन और सरकार से समाधान की मांग कर रहे हैं।
