हरियाणा के रोहतक में हाल ही में हुए इनेलो प्रदर्शन के दौरान डीसी सचिन गुप्ता को लेकर इनेलो सुप्रीमो अभय चौटाला द्वारा दिए गए विवादास्पद बयान के बाद सिरसा के कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया ने डीसी का समर्थन करते हुए अभय चौटाला की आलोचना की है।
गोकुल सेतिया ने अपने आधिकारिक वीडियो संदेश में कहा कि सचिन गुप्ता रोहतक के डीसी हैं, लेकिन वे मूल रूप से सिरसा के छोरे हैं और उनका परिवार हमारे साथ जुड़ा है। उन्होंने अभय चौटाला के बयान को गुप्ता परिवार के सदस्य के अपमान के रूप में देखा और इसकी घोर निंदा की। विधायक ने कहा कि जिस तरह से सिरसा के छोरे के साथ व्यवहार किया गया, वह स्वीकार्य नहीं है और यह टिप्पणी हर किसी के लिए आपत्तिजनक है।
विधायक ने आगे कहा, “अभय चौटाला ने कहा कि मेरी याददाश्त बहुत तेज है, मैं भूलता नहीं। लेकिन यह किस आधार पर सिरसा के छोरे के साथ इस तरह का व्यवहार किया गया, इसका स्पष्टीकरण देना चाहिए। विधानसभा का हिस्सा होने के नाते और बड़े पदों पर रहे व्यक्ति के लिए यह उचित नहीं था।”
मामला 3 नवंबर का है, जब रोहतक में इनेलो ने किसान मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान अभय चौटाला डीसी सचिन गुप्ता को ज्ञापन देने के लिए गए और आधे घंटे का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने कहा था कि यदि डीसी ज्ञापन लेने के लिए नहीं आते हैं, तो उन्हें पता होना चाहिए कि याददाश्त बहुत तेज है। इस दौरान अभय चौटाला ने डीसी से उनके मूल स्थान सिरसा का हवाला भी दिया था।
सचिन गुप्ता मूल रूप से सिरसा के रहने वाले हैं और किसान परिवार से आते हैं। गोकुल सेतिया ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना हर राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है और अभय चौटाला का यह तरीका उचित नहीं था। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यवहार से प्रशासनिक प्रणाली की छवि पर असर पड़ता है।
विधायक सेतिया ने स्पष्ट किया कि उनका यह बयान केवल सचिन गुप्ता के समर्थन में है और इसका उद्देश्य डीसी को अपमानित करने वाले किसी भी कृत्य की निंदा करना है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक ढांचे में अधिकारियों का सम्मान करना आवश्यक है और राजनीतिक मतभेदों को प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

इस वीडियो और बयान के माध्यम से गोकुल सेतिया ने सभी राजनीतिक दलों और जनता से अपील की है कि प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार करें। उन्होंने यह भी कहा कि गुप्ता परिवार और सिरसा समुदाय के प्रति किसी भी तरह की अपमानजनक टिप्पणी को समाज स्वीकार नहीं करेगा।
इस घटना ने रोहतक और सिरसा में राजनीतिक हलकों में चर्चा पैदा कर दी है और आने वाले दिनों में इस विवाद पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और भी बढ़ने की संभावना है।
