पानीपत शहर थाना पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विदेश में रह रहे व्यक्ति के नाम पर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के मामले का खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपने बड़े भाई के नाम पर झूठे दस्तावेज लगाकर लर्निंग लाइसेंस तैयार करवाया था।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान गांव रेर कलां निवासी देवीलाल के रूप में हुई है। इस मामले में पुलिस ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी और सरकारी रिकार्ड में छेड़छाड़ से संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
शिकायत से खुला मामला
थाना प्रभारी इंस्पेक्टर दीवान सिंह ने बताया कि गांव रेर कलां निवासी सुभाष पुत्र श्यामचंद ने जुलाई माह में पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि एसडीएम कार्यालय पानीपत में तैनात ड्राइविंग लाइसेंस क्लर्क अंकित, कंप्यूटर ऑपरेटर अमित और रवि ने दलालों के साथ मिलकर सुभाष पुत्र लछमन के नाम पर फर्जी लर्निंग लाइसेंस तैयार किया था, जो बीते 20 साल से विदेश (इंग्लैंड) में रह रहा है।
शिकायत में बताया गया कि फर्जी लाइसेंस की प्रक्रिया में जाली मेडिकल रिपोर्ट लगाई गई थी और फोटो व ओटीपी वेरिफिकेशन के माध्यम से दस्तावेजों को मंजूरी दी गई थी।
जांच में हुआ बड़ा खुलासा
पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि लाइसेंस वेरिफिकेशन के लिए जिस मोबाइल नंबर का उपयोग किया गया था, वह देवीलाल का था। इसी नंबर पर ओटीपी प्राप्त हुए और उसी से फाइल को वेरिफाई किया गया।
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि फाइल में लगी मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज नकली थे। इसके बाद पुलिस ने आरोपी देवीलाल को उसके गांव से गिरफ्तार कर लिया।

एक लाख रुपए में कराया था फर्जी लाइसेंस
पूछताछ में देवीलाल ने कबूल किया कि उसने अपने भाई सुभाष का फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस एक लाख रुपए में बनवाया था। उसने बताया कि उसका भाई करीब 20 साल पहले इंग्लैंड चला गया था और अब भारत वापस नहीं आ सकता था। कुछ काम के लिए भाई के दस्तावेजों की जरूरत पड़ी, तो उसने गांव के एक व्यक्ति के माध्यम से लाइसेंस तैयार करवाने की सौदेबाजी की।
पुलिस रिमांड पर भेजा गया आरोपी
थाना प्रभारी दीवान सिंह ने बताया कि बुधवार को आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से एक दिन का पुलिस रिमांड मंजूर हुआ है। रिमांड के दौरान पुलिस आरोपी से उसके मोबाइल फोन, बैंक लेनदेन और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है।
पुलिस का कहना है कि इस प्रकरण में एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। यदि जांच में उनकी संलिप्तता पाई गई, तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी सरकारी दस्तावेज को बनवाने के लिए दलालों या निजी एजेंटों का सहारा न लें। सभी प्रक्रियाएं अब ऑनलाइन और पारदर्शी हैं, इसलिए ऐसे मामलों में सतर्क रहना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
