देवउठनी एकादशी के साथ जैसे ही विवाह सीजन की शुरुआत हुई, पानीपत प्रशासन ने बाल विवाह रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से पूरे जिले में विशेष निगरानी अभियान चलाया जा रहा है। जिला बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता के नेतृत्व में गठित टीमें गांव-गांव जाकर लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक कर रही हैं।
गुप्त सूचना के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी
जिला अधिकारी रजनी गुप्ता ने बताया कि जिले की 178 पंचायतों के सरपंचों को विशेष जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने क्षेत्र में होने वाली हर शादी की जानकारी रखें। अगर किसी नाबालिग की शादी की संभावना हो तो तुरंत विभाग या पुलिस को सूचना दें। विभाग ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं, जिन पर कोई भी व्यक्ति गुप्त रूप से सूचना दे सकता है।
स्कूलों और धार्मिक स्थलों पर जागरूकता अभियान
देवउठनी एकादशी से लेकर पूरे विवाह सीजन तक विभाग की टीमें लगातार सक्रिय रहेंगी। स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, पंचायत घरों और धार्मिक स्थलों पर बाल विवाह विरोधी पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में नुक्कड़ नाटक और रैलियों के माध्यम से लोगों को समझाया जा रहा है कि नाबालिग विवाह न केवल गैरकानूनी है, बल्कि बच्चों के भविष्य, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है।

चार साल में 77 मामले दर्ज, कई शादियाँ रोकी गईं
विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में अब तक 20 से अधिक बाल विवाह मौके पर ही रुकवाए गए हैं। पिछले चार वर्षों में कुल 77 बाल विवाह की शिकायतों पर कार्रवाई की गई — 2021 में 16, 2022 में 23, 2023 में 30 और 2024 में 8 मामलों में प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप किया।
डीसी बोले – बाल विवाह बच्चों के अधिकारों पर हमला है
पानीपत के उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया ने कहा कि देवउठनी एकादशी से शुरू होने वाले विवाह समारोहों के दौरान प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के अधिकारों और स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि समाज से इस कुप्रथा को मिटाने में प्रशासन का साथ दें।
