पानीपत के अर्जुन नगर में जिला प्रशासन की सख्त कार्रवाई से 12वीं कक्षा की नाबालिग लड़की की शादी रुकवाई गई। अदालत ने भी मामले को गंभीर मानते हुए विवाह पर तत्काल रोक लगाने के आदेश दिए।
पानीपत में बाल विवाह को लेकर एक बार फिर प्रशासन की सख्ती देखने को मिली। अर्जुन नगर क्षेत्र में 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग लड़की की आज बारात आई थी, लेकिन जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से यह विवाह संपन्न होने से पहले ही रोक दिया गया। अदालत ने भी मामले को गंभीर मानते हुए शादी पर तत्काल रोक लगाने के आदेश जारी किए।
जानकारी के अनुसार, अर्जुन नगर निवासी एक व्यक्ति ने अपनी बेटी की शादी कुरुक्षेत्र निवासी युवक से तय की थी। शादी की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। इस बीच, किसी व्यक्ति ने सूचना दी कि लड़की नाबालिग है। सूचना मिलते ही जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता टीम के साथ मौके पर पहुंचीं और परिवार से पूछताछ की।
रजनी गुप्ता ने बताया कि दस्तावेज जांच में लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम पाई गई। परिवार को समझाया गया कि नाबालिग लड़की की शादी करवाना कानूनन अपराध है। परिवार को बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत सजा और कानूनी परिणामों की जानकारी दी गई।

हालांकि, स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने मामला न्यायिक अधिकारी सरु गोयल की अदालत में प्रस्तुत किया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विवाह पर तुरंत रोक लगाई और पुलिस को निगरानी के निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान लड़की के पिता ने अदालत में कहा कि उन्हें बेटी की उम्र का सही अंदाजा नहीं था और उन्होंने सोचकर शादी तय की थी कि वह बालिग है। अदालत के हस्तक्षेप के बाद पिता ने लिखित आश्वासन दिया कि अब वह शादी नहीं करेंगे और बेटी की शिक्षा जारी रखेंगे।
जिला संरक्षण अधिकारी रजनी गुप्ता ने कहा कि “बाल विवाह बच्चों के अधिकारों पर सबसे बड़ा प्रहार है। समाज को मिलकर ऐसे मामलों को रोकना होगा ताकि हर बच्चा सुरक्षित और शिक्षित भविष्य पा सके।”
