हरियाणा के पंचकूला में एसडीजेएम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए फर्जी जमानती और शिनाख्ती बनने वाले तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह कार्रवाई उस समय की जब खुलासा हुआ कि 2023 में एक आरोपी की जमानत फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करवाई गई थी। आदेश के बाद कालका थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ली गई थी जमानत
मामला 21 जनवरी 2023 का है, जब पंचकूला के कालका एसडीजेएम कोर्ट में एक आरोपी को 35 हजार रुपये के सिक्योरिटी बॉन्ड पर जमानत दी गई थी। उस समय कोर्ट में तीन लोग जमानती और शिनाख्ती के तौर पर पेश हुए थे। उन्होंने पटियाला जिले के ढाकनसू कलां निवासी तरसेम नामक व्यक्ति की जमीन के दस्तावेज जमानत के लिए उपयोग किए थे।
जमानत के समय कोर्ट को यह बताया गया कि दस्तावेज तरसेम के हैं और वही आरोपी की पहचान व जमानत के लिए जिम्मेदार हैं। हालांकि उस समय किसी को संदेह नहीं हुआ कि दस्तावेज फर्जी तरीके से इस्तेमाल किए गए हैं।
असली भूमि मालिक हुआ सामने, किया बड़ा खुलासा
मामला तब सामने आया जब 8 अगस्त 2024 को असली जमीन मालिक तरसेम खुद कोर्ट में पेश हुआ। उसने कोर्ट को बताया कि उसने न तो किसी की जमानत ली है और न ही अपने दस्तावेज किसी को दिए हैं। साथ ही उसने यह भी बताया कि उसके हस्ताक्षर भी फर्जी तरीके से दस्तावेजों पर किए गए हैं।
तरसेम ने बताया कि उसे इस जमानत के बारे में तब पता चला जब आरोपी के कोर्ट में पेश न होने पर जमानती नोटिस उसके घर पहुंचा। नोटिस देखकर वह हैरान रह गया कि उसका नाम और उसके कागज़ात किसी अन्य की जमानत में उपयोग हुए हैं। जब उसने डॉक्यूमेंट निकलवाकर जांच की तो पाया कि सब कुछ फर्जी था।
कोर्ट ने लिया गंभीरता से, FIR दर्ज करने का आदेश
तरसेम की शिकायत सुनने के बाद एसडीजेएम कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए तीनों फर्जी जमानती और शिनाख्ती बनने वाले अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए। कोर्ट का कहना है कि यह न केवल दस्तावेज फर्जीवाड़ा का मामला है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में धोखाधड़ी करने का गंभीर अपराध भी है।

आदेश के बाद कालका थाना पुलिस ने IPC की धारा 419, 420, 467, 468 और 471 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इन धाराओं में पहचान की धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज बनाने और उनका उपयोग करने जैसे अपराध शामिल हैं।
पुलिस ने शुरू की गहन जांच
जांच अधिकारी एसआई देवीदयाल ने बताया कि पुलिस को कोर्ट से संबंधित दस्तावेज प्राप्त हो गए हैं और उनकी जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जांच का पहला चरण यह पता लगाना है कि फर्जी जमानती कोर्ट में पहुंचे कैसे और किसके माध्यम से दस्तावेज तैयार किए गए।
पुलिस उन सभी हस्ताक्षरों, दस्तावेजों और रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच करवा रही है, जिनका उपयोग जमानत की प्रक्रिया में किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की पहचान जल्द ही सामने आ जाएगी और उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाएगा।
न्यायिक प्रक्रिया में फर्जीवाड़े को लेकर सतर्कता जरूरी
यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में बढ़ते फर्जीवाड़े पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। जमानत जैसे संवेदनशील मामलों में यदि आरोपी, जमानती और दस्तावेजों की उचित जांच न की जाए, तो अपराधी आसानी से कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर सकते हैं। कोर्ट द्वारा FIR दर्ज करने का आदेश ऐसे मामलों के प्रति सख्त रुख का संकेत है।
