भिवानी में एनएसएस राष्ट्रीय कैंप का रंगारंग अनुभव
भिवानी के राजकीय मॉडल संस्कृत वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल लोहड़ में 31 अक्टूबर से 6 नवंबर तक आयोजित एनएसएस राष्ट्रीय कैंप में हरियाणा सहित 8 राज्यों से आए 200 वॉलंटियर शामिल हुए। इस कैंप में हरियाणा के चूरमा, खड़ी बोली, दामन और अन्य सांस्कृतिक तत्वों ने सभी पर गहरी छाप छोड़ी। स्वयंसेवकों ने कहा कि इस कैंप में रहकर उनका जाने का मन ही नहीं कर रहा।

विभिन्न राज्यों के अनुभव
पंजाब से अर्षदीप सिंह ने कहा कि उन्होंने हिमाचल की संस्कृति, लोक नृत्य और विवाह के रीति-रिवाज सीखे। वहीं जैस्मिन कौर ने बताया कि उन्होंने बिना परिजनों के खुद पर निर्भर रहना और हर परिस्थिति में संभलना सीखा।
दिल्ली से उमेरा ने पहली बार हरियाणा का चूरमा चखा और हरियाणवी बोली व पहनावे का अनुभव किया। उन्होंने नए शब्द जैसे छोरी, छोरा, डट ज्या, रुक ज्या भी सीखे।
छत्तीसगढ़ की किरण और ललिता साहू ने कहा कि उन्होंने गट्टे की सब्जी चखी और दामन पहनकर अभ्यास किया। शुरुआती दिक्कतों के बावजूद सभी ने नए अनुभवों का आनंद लिया।
हिमाचल से आए आदि और करण ने कहा कि उन्होंने हरियाणा की बोली, कल्चर और फेमस डिश दाल भाटी चूरमा का आनंद लिया। करण ने नेतृत्व की क्षमता विकसित की और वन डे ऑफिसर बनकर वॉलंटियर्स को संभालने का अनुभव प्राप्त किया।
युवा अनुभव और संस्कृति का संगम

कैंप में भाग लेने वाले वॉलंटियर्स ने बताया कि उन्होंने विभिन्न प्रदेशों की भाषाओं, पहनावे और परंपराओं को समझा। यहां बॉयज आपस में भाईचारा ऑन टॉप के साथ बातचीत करते और सभी राज्यों के लोग आपस में भाई-बहन की तरह जुड़ाव महसूस करते थे।
कैंप ने स्वयंसेवकों को न केवल संस्कृति सीखने का अवसर दिया बल्कि लीडरशिप, आत्मनिर्भरता और सहयोग की भावना भी विकसित की। यह अनुभव उनके लिए जीवनभर यादगार रहेगा।
