रोहतक की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (MDU) में महिला कर्मचारियों से पीरियड्स के सबूत दिखाने के विवाद में पुलिस जांच अब तक अटक गई है। मामले में दो बार पुलिस ने लिखित नोटिस भेजा, लेकिन एमडीयू प्रशासन अभी तक अपनी इंटरनल कमेटी की रिपोर्ट पुलिस को नहीं सौंप रहा है। इसके कारण आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।
घटना का विवरण
26 अक्टूबर को एमडीयू में महिला सफाई कर्मचारियों के साथ सुपरवाइजर ने अभद्र व्यवहार करते हुए पीरियड्स की जांच करवाने के निर्देश दिए थे। कर्मचारियों को धमकी दी गई थी कि यदि जांच नहीं करवाई, तो उन्हें नौकरी से हटाया जाएगा। विवश होकर महिलाओं ने यह जांच करवाई, जिसमें उनके प्राइवेट पार्ट्स के फोटो भी खींचे गए।
महिला कर्मचारियों ने इस मामले की शिकायत रजिस्ट्रार को दी, लेकिन वहां से कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने छात्र संगठनों और महिला आयोग को जानकारी दी। महिला आयोग ने भी मामले में संज्ञान लेते हुए एमडीयू प्रशासन से रिपोर्ट मांगी।
महिला आयोग को मिली रिपोर्ट विवादित
एमडीयू प्रशासन की तरफ से महिला आयोग को जो रिपोर्ट दी गई, उसमें केवल तीन छात्र नेताओं पर मामला भड़काने का आरोप लगाया गया। इससे महिला कर्मचारियों का आरोप है कि प्रशासन ने असली दोषियों को बचाने का प्रयास किया।
पुलिस जांच में सहयोग नहीं

पीजीआई थाना एसएचओ रोशन लाल ने बताया कि महिला कर्मचारियों से पीरियड्स के सबूत मांगने के मामले में SC/ST एक्ट के तहत तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज है। लेकिन पुलिस अब तक एमडीयू की इंटरनल रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
पुलिस ने बताया कि दो बार लिखित नोटिस दिया गया, लेकिन एमडीयू प्रशासन अभी तक रिपोर्ट नहीं सौंप रहा। पुलिस का कहना है कि जब तक रिपोर्ट नहीं मिलेगी, आरोपियों की गिरफ्तारी संभव नहीं है।
आरोपियों की स्थिति
मामले में दो सुपरवाइजर और असिस्टेंट रजिस्ट्रार को दोषी माना गया है। लेकिन पुलिस जांच रिपोर्ट के अभाव में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। महिला कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासन की यह ढीली रवैया उनके खिलाफ काम कर रही है।
महिला कर्मचारियों की शिकायतें और नाराजगी
पीड़ित महिलाओं ने महिला आयोग को लिखित शिकायत में बताया कि उनका निजी सम्मान ठेस पहुंची है और प्रशासन मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही दिखाने में विफल रहा। उन्होंने बताया कि मानसिक और शारीरिक सुरक्षा की दृष्टि से यह मामला बेहद गंभीर है।
सार्वजनिक और कानूनी प्रतिक्रिया
महिला आयोग ने मामले में अपनी निगरानी बनाए रखी है और एमडीयू प्रशासन को रिपोर्ट जल्दी सौंपने का निर्देश दिया है। वहीं समाज और छात्र संगठन भी इस मामले को गंभीरता से देख रहे हैं।
कई अधिकारिक और कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि पुलिस जांच में देरी और प्रशासनिक सहयोग की कमी से पीड़ितों का न्याय प्रभावित हो सकता है।
