महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) में शहीद भगत सिंह छात्र संगठन के अध्यक्ष प्रदीप मोटा ने फेसबुक पर वीडियो जारी कर विश्वविद्यालय के वीसी राजबीर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्रदीप मोटा ने कहा कि वह हमेशा छात्रों की समस्याओं को लेकर संघर्ष करते रहे हैं। हाल ही में, वीसी के घर या वाटिका में गमला फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद राजनीतिक रंजिश के कारण उन्हें दो साल के लिए निष्कासित कर दिया गया। प्रदीप के अनुसार, वीसी ने निष्कासन के नाम पर उनके खिलाफ कार्रवाई की है।
कोर्ट में केस और धरना प्रतिबंध
प्रदीप ने बताया कि वीसी ने कोर्ट में भी मामला दर्ज कर रखा है। इसके बाद सिविल कोर्ट ने निर्णय सुनाया कि छात्र कैंपस में धरना प्रदर्शन नहीं कर सकते, यहां तक कि छात्रों की बोलने की आज़ादी भी प्रतिबंधित कर दी गई। जज ने फैसला सुनाते समय छात्र संगठन का पक्ष सुना तक नहीं।
मंत्री को भी गुमराह किया गया

प्रदीप ने आरोप लगाया कि एमडीयू में मंत्री कृष्ण लाल पंवार के आगमन के समय वीसी ने उन्हें गुमराह किया। मंत्री पंवार को ज्ञापन देते समय प्रदीप ने वीसी की अवैध भर्तियों और अन्य अनियमितताओं की जानकारी दी।
बिना विज्ञापन शिक्षक नियुक्ति
प्रदीप ने बताया कि एमडीयू में एक शिक्षक को बिना विज्ञापन निकाले सीधे नौकरी पर लगाया गया, जिसे 1 लाख से अधिक की सैलरी दी जा रही है। इस शिक्षक पर बीबीपुर गांव से 11 लाख रुपए हजम करने के आरोप भी लगे हैं। शिक्षक ने कहा कि विश्वविद्यालय को जरूरत थी, इसलिए उन्हें नियुक्त किया गया।
छात्रों की आवाज़ को हमेशा उठाएंगे
प्रदीप मोटा ने कहा कि उनका आंदोलन केवल वीसी के खिलाफ नहीं बल्कि विश्वविद्यालय में चल रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ है। उनका दावा है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन का निष्कासन निर्णय गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि छात्र संगठन उनके साथ है और यह आंदोलन रूकने वाला नहीं है।
प्रदीप के अनुसार, यूनिवर्सिटी में छात्रों की आवाज़ दबाना और भ्रष्टाचार को छुपाना गंभीर मामला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे छात्र हित और न्याय की लड़ाई जारी रखेंगे।
संगठन का समर्थन और भविष्य की योजना
शहीद भगत सिंह छात्र संगठन ने निष्कासन के खिलाफ आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। संगठन ने छात्र अधिकारों की सुरक्षा और भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है। प्रदीप मोटा का कहना है कि एमडीयू में छात्रों की आवाज़ दबाने का प्रयास विफल रहेगा और सभी छात्रों के हित में वे संघर्ष करेंगे।
