रोहतक की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) में महिला सफाई कर्मचारियों से पीरियड्स के सबूत दिखाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। छात्र नेता दिनेश कांगड़ा, नगर निगम के सफाई कर्मचारी और पीड़ित महिलाएं इस मामले में न्याय की मांग को लेकर पुलिस अधीक्षक (एसपी) सुरेंद्र भौरिया से मिले। इस दौरान उन्होंने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए एसपी को ज्ञापन सौंपा।
26 अक्टूबर को हुआ था विवादित मामला
महिला कर्मचारियों के अनुसार, 26 अक्टूबर को एमडीयू में तैनात सुपरवाइजर ने बेहद अभद्र व्यवहार किया। आरोप है कि सुपरवाइजर ने उन्हें पीरियड्स की जांच करवाने के निर्देश दिए और नौकरी से निकालने की धमकी दी। मजबूरी में महिलाओं को मेडिकल जांच करवानी पड़ी, और इस दौरान उनके निजी अंगों की तस्वीरें भी ली गईं।
यह घटना सामने आते ही पूरे रोहतक में गुस्सा फैल गया और कई सामाजिक संगठनों ने भी इस व्यवहार की कड़ी निंदा की।
पीड़ित महिलाओं ने न्याय की गुहार लगाई
एसपी से मुलाकात में पीड़ित महिलाओं ने साफ कहा कि यह मामला उनके सम्मान और आत्मसम्मान से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की जांच मानवता, नैतिकता और कानून—तीनों के खिलाफ है।
महिलाओं ने मांग की कि दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उन्हें कड़ी सजा दी जाए।
छात्र नेता बोले—यह संवेदनहीनता का चरम है
छात्र नेता दिनेश कांगड़ा ने कहा कि यह घटना न सिर्फ महिला कर्मचारियों का अपमान है, बल्कि प्रशासन की संवेदनहीनता का भी उदाहरण है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
कांगड़ा ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन छेड़ा जाएगा।
एमडीयू प्रशासन ने 2 सुपरवाइजर टर्मिनेट, एआर सस्पेंड किया
इंटरनल कमेटी की रिपोर्ट में सुपरवाइजर वीतेंद्र, विनोद हुड्डा और असिस्टेंट रजिस्ट्रार (एआर) श्याम सुंदर पर दोष साबित हुआ।
इसी आधार पर
- दोनों सुपरवाइजरों को टर्मिनेट किया गया
- एआर को सस्पेंड किया गया
फिर भी पीड़ित पक्ष इस कार्रवाई को अधूरा मान रहा है क्योंकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
छात्र नेता बोले—इंटरनल कमेटी ने महिला आयोग को गलत रिपोर्ट भेजी
दिनेश कांगड़ा ने आरोप लगाया कि इंटरनल कमेटी ने महिला आयोग को गलत रिपोर्ट भेजी है।
कांँगड़ा का आरोप है कि रिपोर्ट में तीन छात्र नेताओं को भी गलत तरीके से आरोपी बनाया गया है, जबकि असली दोषियों को बचाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारी पर पहले से छेड़छाड़ के आरोप हैं, ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती।
एससी-एसटी एक्ट में केस दर्ज, लेकिन गिरफ्तारी नहीं
नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रधान शंभू टॉक ने भी गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने बताया कि तीनों दोषियों पर
- एससी-एसटी एक्ट,
- और अन्य धाराओं में पीजीआईएमएस थाने में केस दर्ज है,
लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि जब तक गिरफ्तारी नहीं होती, यह कार्रवाई आधी-अधूरी मानी जाएगी।
एसपी ने दिलाया कार्रवाई का भरोसा
एसपी सुरेंद्र भौरिया ने शिकायतकर्ताओं को आश्वासन दिया कि इस मामले में जल्द से जल्द उचित और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस फिलहाल मामले की गहराई से जांच कर रही है।

