रोहतक जिले के महम में नगर पालिका द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया। बाजार में लगी फलों की रेहड़ियों को जब्त किए जाने पर रेहड़ी संचालक भड़क उठे और नगर पालिका कार्यालय के मुख्य गेट पर धरना देकर सचिव के खिलाफ नारेबाजी की। हालांकि व्यापार मंडल के हस्तक्षेप से मामला शांत हो गया और रेहड़ियां संचालकों को वापस कर दी गईं।
अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान उठी रेहड़ियां
नगर पालिका कर्मचारियों की टीम शुक्रवार को बाजार में अतिक्रमण हटाने पहुंची। टीम ने पाया कि कई फल विक्रेता दुकानों के बिल्कुल सामने रेहड़ियां लगाकर बैठे थे, जिससे सड़क पर आवागमन बाधित हो रहा था। इस पर सेनेटरी इंस्पेक्टर ब्रह्मजीत ने रेहड़ियों को फलों सहित उठाने के आदेश दिए।
कर्मचारियों ने फलों से भरी सभी रेहड़ियां जब्त कर उन्हें नगर पालिका कार्यालय परिसर में खड़ा कर दिया। इसके बाद बाजार में मौजूद अन्य दुकानदारों और लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई।
रेहड़ी वालों ने लगाया धरना, किए प्रदर्शन
जैसे ही रेहड़ी संचालकों को अपनी रेहड़ियां उठाए जाने की जानकारी मिली, वे तुरंत नगर पालिका दफ्तर पहुंचे। उन्होंने सचिव नवीन नांदल और सेनेटरी इंस्पेक्टर से रेहड़ियां वापस देने की मांग की।
लेकिन अधिकारियों ने साफ कहा कि रेहड़ियां तुरंत नहीं लौटाई जाएंगी। पहले संचालकों को जुर्माना भरना होगा और यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे आगे सड़क पर अतिक्रमण नहीं करेंगे।
इस बात से गुस्साए रेहड़ी संचालकों ने नगर पालिका गेट के सामने धरना शुरू कर दिया और सचिव के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कुछ समय के लिए वहां माहौल काफी गरम हो गया।

व्यापार मंडल के हस्तक्षेप से बनी सहमति
धरने की जानकारी मिलते ही व्यापार मंडल महम के प्रधान जोगिंदर गिरोत्रा मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति को समझकर नगर पालिका सचिव से बातचीत की और रेहड़ी संचालकों की ओर से समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की।
व्यापार मंडल के आग्रह पर सचिव नवीन नांदल तैयार हुए कि रेहड़ियां वापस कर दी जाएंगी, लेकिन साथ ही उन्होंने रेहड़ी वालों को चेतावनी भी दी—
- वे रास्ते में, यानी मेन मार्केट की सड़क पर रेहड़ियां नहीं लगाएंगे।
- वे अपनी रेहड़ियों को पीछे हटाकर निर्धारित स्थान पर लगाएंगे, जिससे आवागमन बाधित न हो।
इस समझौते के बाद रेहड़ी संचालकों ने शांति जताई और रेहड़ियां लौटाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
रेहड़ी वापस मिलने पर समाप्त हुआ धरना
अधिकतर रेहड़ी संचालक जब अपनी रेहड़ियां वापस लेकर लौटे, तो उनका धरना भी समाप्त हो गया। इसके बाद उन्होंने बाजार में जाकर अपनी रेहड़ियां पहले से अधिक पीछे हटाकर लगाईं।
बाजार में इस बदलाव का असर साफ दिखा।
- आवागमन में पहले की तुलना में काफी राहत मिली।
- दुकानों के सामने खुली जगह नजर आई।
- लोगों और वाहनों की आवाजाही सुचारू हुई।
स्थानीय लोगों ने इस कदम का स्वागत किया और कहा कि यदि रेहड़ी संचालक निर्धारित स्थान पर ही बैठें तो बाजार में भीड़भाड़ कम होगी और सभी को सुविधा मिलेगी।
