कैथल में जिला परिषद की बैठक के दौरान उपाध्यक्ष के प्रतिनिधि द्वारा पिस्तौल लेकर पहुंचने का मामला लगातार विवादों में घिरता जा रहा है। यह मामला न केवल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि प्रतिनिधियों की भूमिका और बैठक की संवैधानिक प्रक्रियाओं को भी केंद्र में ले आया है। सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है और संबंधित प्रतिनिधि के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
फिल्मी स्टाइल में पिस्तौल लगाकर पहुंचे प्रतिनिधि
जानकारी के अनुसार, जिला परिषद उपाध्यक्ष सोनिया के प्रतिनिधि कर्मबीर फौजी चार दिन पहले जिला परिषद की बैठक में फिल्मी अंदाज में कमर पर पिस्तौल टांगकर पहुंचे थे। बैठक के दौरान उन्होंने बेल्ट में टंगी पिस्तौल के साथ ही कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। इससे न सिर्फ बैठक में मौजूद सदस्यों में असहजता फैली, बल्कि सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गईं।
अधिकारियों के अनुसार, प्रतिनिधियों को बैठक में प्रवेश की अनुमति नहीं होती। इसके बावजूद कर्मबीर फौजी बैठक हॉल में पहुंच गए और हथियार सहित अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।वीडियो हुआ वायरल, प्रतिनिधि का दावा झूठा साबित
घटना के दौरान किसी व्यक्ति ने उनके पिस्तौल सहित वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि उनकी कमर पर लोडेड पिस्तौल टंगी हुई है।
जब मामले पर कर्मबीर फौजी से सवाल किया गया, तो उन्होंने दावा किया कि वे केवल बेल्ट पहनकर आए थे, लेकिन वीडियो ने उनका दावा गलत साबित कर दिया। वीडियो में पिस्तौल और उसमें लगी गोलियां स्पष्ट दिखाई दे रही हैं।
डीसी ने लिया संज्ञान, DMC को कार्रवाई के आदेश
जिला परिषद के डिप्टी CEO सुमित चौधरी ने बताया कि कैथल DC ने मामले पर तुरंत संज्ञान लेते हुए DMC कैथल को नियम अनुसार कार्रवाई करने के आदेश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि बैठक की कार्यवाही में केवल चुने हुए सदस्य और पदाधिकारी ही शामिल हो सकते हैं। प्रतिनिधियों की बैठकों में कोई भूमिका नहीं होती और उन्हें अंदर प्रवेश नहीं दिया जाता।

उन्होंने स्पष्ट किया कि हथियार या किसी भी प्रकार का असलहा लेकर हाउस में प्रवेश करना पूर्णतः प्रतिबंधित है। प्रतिनिधियों को सम्मानपूर्वक बाहर बैठने की व्यवस्था की जाती है, लेकिन बैठक हॉल में आने की अनुमति नहीं होती।
सुरक्षा व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
इस पूरी घटना ने जिला परिषद परिसर की सुरक्षा और जांच व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इतना बड़ा हथियार लेकर किसी का बिना जांच बैठक हॉल तक पहुंच जाना गंभीर लापरवाही का संकेत देता है। प्रशासन अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि हथियार लेकर हॉल में प्रवेश कैसे हो गया और किस स्तर पर चूक हुई।
कार्रवाई की तैयारी, जल्द होगा निर्णय
प्रशासनिक अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें सख्त निर्णय लिया जा सकता है। DMC कैथल इस मामले में नियमों के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर चुका है, जिसमें प्रतिनिधि पर कानूनी कार्रवाई, असलहे की लाइसेंस संबंधी जांच और अन्य दंडात्मक कदम शामिल हो सकते हैं।
स्थानीय राजनीति में गरमाहट
घटना के बाद स्थानीय राजनीति में भी गर्मी बढ़ गई है। कई सदस्य और सामाजिक संगठन इस मामले को सुरक्षा व्यवस्था की विफलता बता रहे हैं और कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। वहीं आमजन भी सवाल उठा रहे हैं कि जब जिला परिषद जैसी उच्च स्तरीय बैठक में इस तरह का मामला हो सकता है, तो अन्य सार्वजनिक कार्यक्रम कितने सुरक्षित हैं।
