कैथल जिले में पंचायत चुनाव की पुरानी रंजिश के सिलसिले में एक युवक गुरचरण के अपहरण कर उसे पीटने और दोनों टांगें तोड़ने का आरोप लगा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर विधायक कुलवंत बाजीगर, उनके दो बेटों व अन्य पर कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच जारी है।
कैथल (हरियाणा): जिले में तीन साल पुरानी पंचायत चुनाव रंजिश से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है — आरोप है कि पंजाब के पटियाला जिले के शुतराणा हलके के विधायक कुलवंत बाजीगर और उनके दो बेटों व कुछ अन्य लोगों ने मिलकर एक युवक का अपहरण किया, उसे पीटा और दोनों टांगे तोड़ दीं। पीड़ित युवक ने यह शिकायत पुलिस को दी और पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्या हुआ — घटना का क्रम (आरोप के अनुसार)
- पीड़ित युवक गुरचरण ने बताया कि 28 अक्टूबर को वह और उसका दोस्त गांव खरकां से बजरी लाने गए थे। वहां एक स्विफ्ट कार में सवार युवकों ने पिस्तौल दिखाकर उन्हें बाहर खींच लिया।
- आरोपियों में से दो के हाथ में पिस्तौल और एक के पास लोहे की रॉड थी। उन्हें कार में बैठाकर ले जाया गया और नहर के पास पीटा गया। परीक्षण के दौरान आरोपियों में से एक ने किश्तों पर वीडियो कॉल के जरिए विधायक के बेटे का नाम लिया।
- घटना के दौरान आरोपीयों में से एक ने कहा कि “इसकी दोनों टांगे तोड़ दो।” आरोप है कि फिर लोहे की रॉड से युवक की टांगों पर वार किए गए। बाद में कुछ लोग आते देख आरोपी भाग गये।

प्रशासन की प्रतिक्रिया
कैथल के पुलिस अधिकारियों ने आरोपों के आधार पर विधायक व अन्य पर मामला दर्ज करने की पुष्टि की है। डीएसपी गुहला कुलदीप बेनीवाल ने बताया कि मामला दर्ज कर जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पीड़ित का बयान
गुरचरण ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी पोस्ट किया है, जिसमें उसने कहा कि यह सब उसी पंचायत चुनाव रंजिश के चलते हुआ, और आरोपियों ने पहले भी उसे धमकाया था। उसने बताया कि आरोपियों ने पहले जमीन पर कब्जा किया हुआ था और वह उसकी निशानदेही करने गया था — इसी बीच उन पर हमला किया गया। गुरचरण ने कहा कि वह कानूनी लड़ाई जारी रखेगा।
पुलिस कार्रवाई
घटना की रिपोर्ट मिलने पर संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपियों की पहचान और पकड़ के प्रयास तेज कर दिए हैं; मामले की गहनता से जांच जारी है।
ध्यान दें: ऊपर दी गई जानकारी आरोपों पर आधारित है — जांच जारी है और आरोपों की सत्यता अभी अदालत या पुलिस की निष्पक्ष जांच से तय होगी।
