हरियाणा के सीनियर आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार सुसाइड केस की जांच CBI से कराने की मांग को लेकर शुक्रवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान लुधियाना निवासी याचिकाकर्ता नवनीत कुमार की ओर से बहस के लिए समय मांगा गया, जिसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख तय करते हुए कार्यवाही स्थगित कर दी।
इस मामले की जांच फिलहाल चंडीगढ़ पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) कर रही है। सुनवाई मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की पीठ के समक्ष हुई।
HC ने पूछा – “इस मामले में ऐसा क्या असाधारण है?”
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश शील नागू ने याचिकाकर्ता से कहा —
“सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, जांच तभी CBI को सौंपी जाती है जब कुछ असाधारण परिस्थितियां हों। इस मामले में ऐसा क्या खास है कि हमें CBI जांच का आदेश देना चाहिए?”
कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सर्वोच्च न्यायालय के उन फैसलों का उल्लेख करने को कहा, जिनके आधार पर उच्च न्यायालय केंद्रीय एजेंसी को जांच सौंप सकता है।
याचिकाकर्ता एक NGO चलाता है
याचिका नवनीत कुमार, निवासी लुधियाना द्वारा दायर की गई, जिन्होंने खुद को “होप वेलफेयर सोसाइटी” नामक एनजीओ का अध्यक्ष बताया।
उन्होंने कहा कि —

“यह याचिका भारतीय पुलिस सेवा की अखंडता की रक्षा और कानून के शासन को बनाए रखने के लिए दायर की गई है। जांच स्थानीय प्रभाव से मुक्त और निष्पक्ष होनी चाहिए।”
PIL में मांगी गई ये मुख्य मांगें:
- आईपीएस वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या मामले की जांच CBI से कराई जाए।
- SIT की जांच पर अदालत निगरानी रखे, ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
नवनीत कुमार के वकील वी.के. शर्मा ने कहा कि —
“यह केवल सुसाइड का मामला नहीं है, बल्कि यह पुलिस सिस्टम की कार्यशैली और वरिष्ठ अधिकारियों पर मानसिक दबाव की गंभीर तस्वीर भी दिखाता है।”
आईपीएस अधिकारी की पत्नी ने मांगी पति के मोबाइल-लैपटॉप की वापसी
वाई. पूरन कुमार की पत्नी और वरिष्ठ IAS अधिकारी अमनीत पी. कुमार ने भी कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि उनके पति के दो मोबाइल फोन और एक लैपटॉप पुलिस ने कब्जे में लिए थे, जिनमें निजी और वित्तीय जानकारी है।
उन्होंने मांग की कि —
“पुलिस ने जांच के लिए जो डेटा चाहिए था, वह ले चुकी है। अब ये डिवाइस हमें लौटा दिए जाएं।”
क्या है वाई. पूरन कुमार सुसाइड केस
7 अक्टूबर को चंडीगढ़ सेक्टर-11 स्थित आवास पर हरियाणा के आईजी रैंक अधिकारी वाई. पूरन कुमार ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।
उन्होंने 8 पेज का सुसाइड नोट और एक पेज की वसीयत छोड़ी थी।
सुसाइड नोट में उन्होंने हरियाणा के DGP शत्रुजीत कपूर, रोहतक SP नरेंद्र बिजारणिया सहित 15 वर्तमान और पूर्व अधिकारियों पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे।
घटना से एक दिन पहले रोहतक पुलिस ने उनके गनमैन सुशील कुमार को रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
पुलिस के अनुसार, गनमैन ने स्वीकार किया था कि उसने पूरन कुमार के कहने पर रिश्वत मांगी थी। हालांकि, 7 अक्टूबर तक पूरन कुमार को पुलिस ने कोई नोटिस जारी नहीं किया था।
