हिसार जिले के बास क्षेत्र के उगालन गांव में दहेज प्रताड़ना का मामला सामने आया है। पुलिस ने विवाहिता मोहिनी की शिकायत पर उसके पति अंजनी के खिलाफ मारपीट, दहेज मांगने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में केस दर्ज किया है।
शादी और दहेज की जानकारी
मोहिनी ने बताया कि उसकी शादी 26 मई 2017 को अंजनी से हुई थी। मायके पक्ष ने अपनी हैसियत से बढ़कर लगभग 20 लाख रुपए का दहेज दिया था। इसमें बाइक, फ्रिज, एलईडी, सोने-चांदी के गहने और फर्नीचर शामिल थे।
ससुराल का दबाव और पति की भूमिका
शादी के तुरंत बाद से ही ससुराल पक्ष दहेज कम लाने का ताना देने लगा। मोहिनी के अनुसार सास, ससुर और ननद अक्सर उसके पति को उकसाते थे और उससे सोने की चेन और कार लाने का दबाव बनाते थे।
पहले भी हुई मारपीट
वर्ष 2019 और 2020 में मोहिनी के साथ कार और दो तोला सोने की चेन की मांग को लेकर मारपीट की गई। इसके लिए उसके पिता ने पंचायती स्तर पर मामले को शांत कराने के लिए 50 हजार रुपए भी दिए थे, लेकिन प्रताड़ना जारी रही।

30 सितंबर की हिंसक घटना
मोहिनी ने बताया कि 30 सितंबर को चारों आरोपियों ने उसे थप्पड़ और लात-घूंसों से पीटा, बाल पकड़कर घसीटा और अपनी छह वर्षीय बच्ची सहित केवल तीन कपड़ों में घर से बाहर निकाल दिया। उसे धमकी दी गई कि बिना गाड़ी और सोने की चेन के लौटने पर जान से मार दिया जाएगा
पुलिस जांच और कार्रवाई
एसआई सुमन रानी ने शिकायत के आधार पर दोनों पक्षों की कई बार काउंसलिंग की और बयान दर्ज किए। जांच में पति अंजनी पर मारपीट, दहेज मांगने, मानसिक प्रताड़ना और धमकी देने के आरोप पुष्ट हुए।
पुलिस ने अंजनी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 115, 85, 316(2) और 351(2) के तहत मामला दर्ज किया है। वहीं, सास शामो देवी, ससुर महेंद्र और ननद सुमन पर लगे आरोप साक्ष्य के अभाव में सही नहीं पाए गए।
महिला सुरक्षा और समाज में संदेश
यह मामला स्पष्ट करता है कि दहेज प्रताड़ना आज भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए गंभीर खतरा है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और शिकायत दर्ज कराना महिलाओं की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों के अनुसार, दहेज प्रताड़ना के मामलों में पीड़ित को तुरंत पुलिस या महिला हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए। समय पर कार्रवाई से न केवल महिला सुरक्षित रहती है, बल्कि आरोपी के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई भी संभव हो पाती है।
उगालन गांव में हुए इस मामले ने यह संदेश दिया है कि दहेज की मांग और घरेलू हिंसा के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है। महिला सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता के लिए यह घटना चेतावनी की तरह है। न्यायिक प्रक्रिया के जरिए पीड़ित महिला को सुरक्षा और आरोपी को सजा दिलाना समाज के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
