हरियाणा के हिसार में परिवार पहचान पत्र (PPP) से जुड़े धोखाधड़ी के एक चर्चित मामले में सेशन जज अलका मलिक की अदालत ने आरोपी शकील अहमद को नियमित जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को एरिया मजिस्ट्रेट की पूर्ण संतुष्टि के बाद ही जमानत पर रिहा किया जाएगा। आरोपी 24 अक्टूबर 2025 से न्यायिक हिरासत में था।
आरोपी को 24 अक्टूबर 2025 को किया गया था गिरफ्तार
इस मामले में आदमपुर थाना पुलिस ने 28 अप्रैल 2024 को FIR दर्ज की थी। जांच के दौरान आरोपी शकील अहमद को 24 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले महिला सहित कुल पाँच लोगों—आरती सिसोदिया, सुरेंद्र सूथार, लितानी निवासी सुरेंद्र, और भिवानी निवासी परवेश—के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया था।
इन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 406, 420, 201 और 120-B, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 65 और 66C, तथा हरियाणा परिवार पहचान अधिनियम की धारा 35 और 36 के तहत मुकदमा चला था।
एक मोबाइल नंबर से बनाए गए थे दो PPP
इस धोखाधड़ी का खुलासा उस समय हुआ जब 24 अप्रैल 2024 को तत्कालीन एडीसी और आईएएस अधिकारी नीरज की शिकायत पर विभागीय जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि एक ही मोबाइल नंबर को दो अलग-अलग PPP के लिए अपलोड किया गया था और आरती सिसोदिया ने बिना किसी दस्तावेज को अपलोड किए एक अलग परिवार पहचान पत्र बनवा लिया था।
आरती सिसोदिया ने बताया था कि उसने यह PPP अपने दोस्त कैलाश गर्ग और कॉमन सर्विस सेंटर संचालक सुरेंद्र सूथार की सहायता से बनवाया। सूथार ने बताया कि यह काम उसने लितानी निवासी सुरेंद्र की मदद से किया था, जिसने आगे भिवानी निवासी परवेश का नाम लिया।
अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि शकील अहमद भी इस अवैध PPP बनाने में शामिल था और उसने दस्तावेज आगे को-एक्यूज्ड सुरेंद्र (लितानी) को भेजे थे।

बचाव पक्ष की दलील—“शकील को बेवजह फंसाया गया”
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील विकास गोयत ने कहा कि FIR झूठे और मनगढ़ंत तथ्यों पर दर्ज की गई है। उन्होंने दलील दी कि सह-आरोपियों ने पुलिस की मिलीभगत से शकील को बेवजह फंसाया है।
उन्होंने कहा कि—
- शकील के खिलाफ कोई ठोस आपराधिक सामग्री नहीं मिली है
- उसका धोखाधड़ी में सीधा रोल सिद्ध नहीं होता
- जिन धाराओं में केस दर्ज है, वे न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय हैं
- और लंबी जांच व ट्रायल को देखते हुए उसे जमानत मिलनी चाहिए
सरकारी वकील का विरोध—“गवाहों पर दबाव डाल सकता है”
वहीं सरकारी वकील नरेंद्र कुमार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामले की जांच अभी जारी है। यदि आरोपी को जमानत मिलती है तो वह गवाहों पर दबाव डाल सकता है और जांच को प्रभावित कर सकता है।
अदालत का निर्णय—“जांच में समय लगेगा, आरोपी पहले ही 24 अक्टूबर से जेल में”
सेशन जज अलका मलिक ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि अभियोजन पक्ष के रिकॉर्ड में आरोपी की संलिप्तता का संकेत मिलता है, लेकिन—
- आरोपी 24 अक्टूबर 2025 से जेल में है
- पूछताछ के लिए उसकी हिरासत की अब आवश्यकता नहीं
- और जांच एवं ट्रायल में लंबा समय लग सकता है
इन्हीं आधारों पर अदालत ने शकील अहमद को नियमित जमानत देने का आदेश दिया।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि आरोपी को एरिया/ड्यूटी मजिस्ट्रेट की पूर्ण संतुष्टि पर जमानत पर रिहा किया जाए।
