हिसार जिले में गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग की नीतियों के विरोध में सरकारी डॉक्टरों ने दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल की। यह हड़ताल विशेष रूप से एसएमओ (सीनियर मेडिकल ऑफिसर) की सीधी भर्ती का विरोध करने के लिए की गई। लगभग चार हजार से अधिक सरकारी डॉक्टर सुबह 9 बजे से 11 बजे तक ओपीडी सेवाओं से दूर रहे, जिससे सामान्य मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
यह विरोध प्रदर्शन एचसीएमएसएसए (हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन) के प्रदेशव्यापी आह्वान पर किया गया। हिसार में डॉक्टरों ने महाराजा अग्रसेन जिला नागरिक अस्पताल के सिविल सर्जन कार्यालय के सामने एकत्र होकर अपनी मांगों को जोरदार तरीके से रखा।
सीधी भर्ती को बताया गलत, सरकार से रोक लगाने की मांग
हिसार जिला इकाई के महासचिव डॉ. अनीश चहल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में डॉक्टर प्रदर्शन में शामिल हुए। उनके साथ डॉ. सुरेंद्र बिश्नोई, डॉ. अजीत लाठर, डॉ. विष्णु और सिविल अस्पताल सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों के डॉक्टर मौजूद रहे।
डॉक्टरों ने कहा कि एसएमओ की सीधी भर्ती नीति गलत और डॉक्टरों के हितों के खिलाफ है। उनका कहना है कि इस तरह की सीधी भर्ती से वरिष्ठता, अनुभव और पदोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित होगी।
एसोसिएशन के डॉक्टरों ने सरकार से मांग की कि इस भर्ती प्रक्रिया को फौरन रोका जाए और मौजूदा नीति पर बातचीत कर समाधान निकाला जाए।
“नीति में बदलाव तक विरोध जारी रहेगा” — डॉक्टरों की चेतावनी
एचसीएमएसए के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राजेश ख्यालिया ने कहा कि सरकार को कई बार आग्रह किया गया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा:
“जब तक सरकार नीति में सुधार नहीं करती, हमारा विरोध जारी रहेगा। डॉक्टरों को मजबूर होकर सड़क पर उतरना पड़ा है।”
डॉ. अजीत लाठर ने भी कहा कि प्रतिनिधि मंडल कई बार स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर चुका है, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। एसोसिएशन अब आगे की रणनीति तैयार कर रही है, जिसमें प्रदर्शन को और तेज किया जा सकता है।

ओपीडी सेवाएं प्रभावित, केवल आपातकालीन सेवा संचालित
हड़ताल के दौरान सिर्फ आपातकालीन सेवाएं ही चालू रहीं। जिला अस्पतालों और सीएचसी/पीएचसी में सामान्य मरीजों को ओपीडी न मिलने से काफी परेशान होना पड़ा।
ओपीडी बंद रहने के चलते कई मरीज सुबह से कतारों में इंतजार करते रहे। हालांकि, पीजी डॉक्टरों ने गंभीर और जरूरतमंद मरीजों का इलाज किया, ताकि किसी भी तरह की बड़ी समस्या न हो।
मरीजों में नाराजगी, डॉक्टरों ने जताई मजबूरी
एक तरफ जहां मरीज हड़ताल से परेशान दिखे, वहीं डॉक्टरों का कहना है कि वे मजबूरी में विरोध कर रहे हैं। डॉक्टरों का तर्क है कि:
- सीधी भर्ती से सिस्टम में असमानता बढ़ेगी
- प्रमोशन और वरिष्ठता पर विपरीत असर पड़ेगा
- डॉक्टरों के मनोबल पर नकारात्मक असर पड़ेगा
क्या है एसएमओ की सीधी भर्ती का मुद्दा?
सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि सीनियर मेडिकल ऑफिसर के पद पर सीधी भर्ती की जाए, जबकि पहले यह पद केवल अनुभव और प्रमोशन से भरा जाता था।
डॉक्टरों का कहना है कि यह नीति डॉक्टरों के भविष्य और करियर प्रगति के लिए नुकसानदायक है।
हड़ताल के बाद डॉक्टर सामान्य रूप से वापस काम पर लौट आए, लेकिन उन्होंने स्पष्ठ कर दिया कि यदि सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
