हिसार में सरकारी डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने मरीजों के हालात बिगाड़ दिए हैं। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (HCMSA) ने अपनी मांगों के समर्थन में बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया, जिसके बाद जिले में एक्स-रे, सर्जरी, सिजेरियन और ओपीडी सेवाएं काफी प्रभावित हो गई हैं। खासकर एक ही डॉक्टर से इलाज करा रहे मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
128 डॉक्टरों के छुट्टी पर जाने से बिगड़े हालात
हिसार सिविल अस्पताल प्रशासन ने प्रोबेशन पीरियड पर चल रहे 25 डॉक्टरों को शो-कॉज नोटिस भेजा है, लेकिन अभी तक कोई भी डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं लौटा है।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने अग्रोहा मेडिकल कॉलेज से 20 डॉक्टरों को तैनात करने का फैसला लिया।
लेकिन 128 डॉक्टरों के एक साथ छुट्टी पर जाने के कारण अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी हो गई है। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज से हिसार के अलावा सिरसा और फतेहाबाद के लिए भी डॉक्टर भेजे गए हैं, जिससे वहां भी चिकित्सा सेवाएं प्रभावित होंगी।

सरकार का सख्त रुख: डॉक्टरों की हड़ताल पर 6 महीने का बैन
हरियाणा सरकारी डॉक्टरों की दो दिन की चेतावनी हड़ताल के बावजूद सरकार ने उनकी सभी मांगें मानने से इनकार कर दिया है।
सरकार ने आवश्यक सेवाएं अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) लागू करते हुए हड़ताल पर 6 महीने का प्रतिबंध लगा दिया है।
हेल्थ सेक्टर को आवश्यक सेवा मानते हुए सरकार का मानना है कि इस समय डॉक्टरों की हड़ताल से आम जनता की जान जोखिम में पड़ सकती है। इसलिए कड़े कदम उठाना जरूरी था।
डॉक्टर आखिर क्यों कर रहे हैं हड़ताल?
HCMSA और राज्य सरकार के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन सहमति नहीं बन पाई।
डॉक्टरों की मुख्य मांगें:
- वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (SMO) की सीधी भर्ती पर रोक
- एश्योर्ड करियर प्रमोशन (ACP) में सुधार
- सेवा शर्तों में पारदर्शिता
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज द्वारा SMO की सीधी भर्ती रोकने की मंजूरी दी गई थी, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में इसे लागू नहीं किया जा रहा।
स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, और स्वास्थ्य सचिव सुधीर राजपाल के साथ हुई बैठकों में SMO की सीधी भर्ती न करने पर सहमति बनी थी, लेकिन ACP को लेकर अब भी विवाद जारी है।
मरीजों का दर्द: “न एक्स-रे हो रहा, न सर्जरी”
हिसार के कई मरीजों ने शिकायत की कि अस्पतालों में न तो एक्स-रे हो पा रहा है और न ही जरूरी सर्जरी।
गर्भवती महिलाओं को सिजेरियन के लिए वैकल्पिक अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है, जहां खर्च और दूरी दोनों बढ़ जाते हैं।
एक मरीज के परिजन ने कहा—
“अगर डॉक्टर नहीं हैं तो हम जाएँ कहाँ? गरीब आदमी को तो सरकारी अस्पताल ही सहारा होता है।”
आगे क्या?
सरकार और HCMSA दोनों अपने-अपने रुख पर अड़े हैं।
जब तक ACP और SMO भर्ती नीति पर अंतिम फैसला नहीं होता, हड़ताल खत्म होने की संभावना कम दिखाई देती है।
इस बीच मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई हैं।
