हिसार में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल के साथ 71.27 लाख की साइबर ठगी, फर्जी ट्रेडिंग ग्रुप बनाकर हड़पी रकम
हरियाणा के हिसार जिले में साइबर अपराधियों ने रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल गुरनीश सिंह को ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों के मुनाफे का झांसा देकर 71.27 लाख रुपए की भारी ठगी कर ली। मामला सामने आने के बाद साइबर क्राइम थाना हिसार ने धारा 318(4), 61 BNS के तहत केस दर्ज कर लिया है।
शिकायत के अनुसार, पूरी ठगी का खेल एक फर्जी व्हाट्सऐप ट्रेडिंग ग्रुप से शुरू हुआ, जहां पीड़ित को निवेश का लालच देकर धीरे-धीरे लाखों रुपए हड़पे गए।
फर्जी व्हाट्सऐप ग्रुप “H204-Reliance Market Nexus” से हुई शुरुआत
10 सितंबर 2025 को लेफ्टिनेंट कर्नल गुरनीश सिंह को एक व्हाट्सऐप ग्रुप “H204-Reliance Market Nexus” में जोड़ा गया।
ग्रुप खुद को रिलायंस सिक्योरिटीज का आधिकारिक स्टॉक इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म बता रहा था।
ग्रुप एडमिन राकेश जैन और अद्विका शर्मा स्वयं को मार्केट एक्सपर्ट बताते हुए पीड़ित को निवेश के लिए लगातार प्रेरित करते रहे।
दूसरे फर्जी ग्रुप और नकली ट्रेडिंग अकाउंट से ठगे लाखों रुपए
7 अक्टूबर के बाद अद्विका शर्मा ने एक अलग ग्रुप V95 – Reliance Securities Customer बनाया।
यहां से पीड़ित को फर्जी ऐप RARC II और नकली वेबसाइट pc.rarcvip.com पर ट्रेडिंग अकाउंट खोलने के लिए कहा गया।
इसके बाद साइबर ठगों ने अनेक खातों में कई किस्तों में रकम जमा करवाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
कई खातों में लगातार भेजे गए लाखों रुपए
पीड़ित द्वारा भेजी गई रकम इस प्रकार रही—
- 15, 16, 17, 20 और 23 अक्टूबर: लाखों रुपए
- 24 अक्टूबर: 25 लाख + 1.9 लाख + 2.5 लाख
- 3 नवंबर: 11 लाख रुपए
- 27 अक्टूबर: 2.68 लाख (रिफंड कर भरोसा बनाया)
- 20 अक्टूबर: 5,000 रुपए (पहला रिफंड)
कुल मिलाकर 71.27 लाख रुपए ठगों के खातों में भेज दिए गए।
नकली शेयर अलोकेशन दिखाकर किया गया मानसिक दबाव

1 नवंबर को पीड़ित के फर्जी अकाउंट में Orkla India Ltd के 34,400 शेयर दिखाए गए, जिनकी कीमत 1.56 करोड़ रुपए बताई गई।
जब उन्होंने इस पर सवाल उठाया, तो उन्हें धमकाया गया कि नियमों के अनुसार और पैसे जमा न कराने पर उनका पूरा निवेश डूब जाएगा।
बैंक ने चेताया, तब खुला धोखे का सच
3 नवंबर को जब उन्होंने 11 लाख की NEFT रोकने के लिए इंडसइंड बैंक प्रबंधक अरुण मदान से संपर्क किया तो बैंक ने साफ कर दिया कि यह खाता संदिग्ध है।
बैंक की चेतावनी के बाद भी 11 नवंबर को पीड़ित ने 50,000 रुपए जमा किए।
18 नवंबर को साइबर ठगों ने 3 लाख रुपए और मांगे, तब जाकर पीड़ित को पूरी तरह एहसास हुआ कि वे संगठित साइबर गैंग के जाल में फंस गए हैं।
साइबर क्राइम थाना हिसार ने दर्ज किया केस
पीड़ित ने 20 नवंबर 2025 को साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई।
तफ्तीश के बाद पुलिस ने पाया कि मामला एक संगठित साइबर ठगी गैंग का है।
27 नवंबर को केस दर्ज किया गया।
पीड़ित ने पुलिस से—
- संबंधित बैंक खातों को फ्रीज करने
- ग्रुप एडमिन राकेश जैन, अद्विका शर्मा और अन्य सहयोगियों पर कार्रवाई
- तथा ठगी गई राशि की रिकवरी
की मांग की है।
