हिसार जिले के बालसमंद गांव में गुरुवार को अखिल भारतीय किसान सभा की ओर से आयोजित किसान महापंचायत में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक किसान की हार्ट अटैक से मौके पर ही मौत हो गई। मृतक किसान की पहचान गांव बालसमंद निवासी रामकुमार के रूप में हुई है। किसान धरने पर अपने साथियों के साथ बैठे थे और जैसे ही एसडीएम ज्योति मित्तल वहां पहुंचीं, उसी दौरान किसान अचानक कुर्सी पर गिर पड़े। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
किसानों ने रामकुमार को शहीद का दर्जा देने की मांग की है।
SDM पहुंचीं, किसानों ने रखा अपना पक्ष
महापंचायत में किसानों की समस्याओं और बाढ़ पीड़ितों के मुआवजे को लेकर लंबा विमर्श हुआ। यहां SDM ज्योति मित्तल किसानों की मांगें सुनने पहुंचीं। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी मांगों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
किसान नेता संदीप धीरणवास ने कहा कि सरकार को 12 जनवरी तक का अल्टीमेटम दिया गया है। यदि तब तक किसानों को मुआवजा नहीं मिलता, तो जिलेभर की सभी तहसीलों में धरना दिया जाएगा और लघु सचिवालय पर बड़ा पड़ाव डाला जाएगा।
विधायक बलवान पुनिया बोले—यह सभी किसानों की लड़ाई
महापंचायत में पहुंचे विधायक बलवान पुनिया कामरेड ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि यह लड़ाई सिर्फ यहां के किसानों की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों की लड़ाई है। उन्होंने मनरेगा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अगर मनरेगा मजदूर सिस्टम में नहीं होते, तो छोटे किसान काफी पहले ही मजदूर बन चुके होते।

उन्होंने कहा कि हरियाणा में 2 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन बाढ़ से जलमग्न हो गई थी, लेकिन केंद्र सरकार किसानों को उचित मुआवजा देने में असफल रही।
देश में तानाशाही बढ़ रही है” – किसानसभा नेता
हनुमानगढ़ किसान सभा महासचिव ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज देश का लोकतंत्र खतरे में है और किसानों की हालत लगातार खराब हो रही है। उन्होंने तानाशाही बढ़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों को अपने हक की लड़ाई लंबी लड़नी होगी।
शराब ठेके का मुद्दा गरमाया – “किसान खुद उखाड़ फेंकेंगे”
महापंचायत में डोभी में खुले नए शराब ठेके का मुद्दा भी गरमाया। किसान नेता संदीप धीरणवास ने चेतावनी देते हुए कहा कि
अगर प्रशासन एक सप्ताह में ठेका नहीं हटवाता, तो किसान खुद इसे उखाड़ फेंकेंगे।
किसान की हार्ट अटैक से मौत – परिवार में पसरा मातम
धरने में शामिल किसान रामकुमार (बालसमंद) एसडीएम के सामने ही बेहोश होकर गिर पड़े। अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
संदीप धीरणवास ने कहा कि किसान रामकुमार को शहीद का दर्जा दिया जाए, क्योंकि वह किसानों के आंदोलन और अधिकारों के लिए लड़ते हुए मौत का शिकार हुए।
रामकुमार के परिवार में 2 लड़के और 3 लड़कियां हैं, सभी विवाहित हैं। एक बेटा शिक्षक है। किसान की अचानक मौत से पूरे गांव और किसान समुदाय में शोक की लहर है।
