गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर हरियाणा में ‘हिंद की चादर’ यात्राओं का आयोजन लगातार किया जा रहा है। इसी कड़ी में पानीपत जिले के ऐतिहासिक इसराना साहिब गुरुद्वारा से एक विशेष यात्रा को रवाना किया गया। इस कार्यक्रम में एसडीएम नवदीप सिंह नैन और संत श्री राजेंद्र सिंह ने विशेष रूप से शिरकत की। यात्रा की शुरुआत दोपहर 12 बजे संत भवन इसराना साहिब गुरुद्वारा से हुई, जहां श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उपस्थित रही।
यात्रा के शुभारंभ अवसर पर संत राजेंद्र सिंह ने एसडीएम नवदीप सिंह नैन को सरोपा भेंट कर सम्मानित किया। यह सम्मान गुरु घर की परंपरा के तहत दिया गया, जो सेवा, समर्पण और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। यात्रा के दौरान संगत ने गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाओं का स्मरण करते हुए शांति, सद्भावना और भाईचारे के मंत्र को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
धर्म प्रचार कमेटी कर रही है यात्रा का नेतृत्व
इस 350वें सालाना शहीदी दिवस यात्रा का नेतृत्व धर्म प्रचार कमेटी द्वारा किया जा रहा है। कमेटी के सेक्रेटरी और हेड ग्रंथी गुरमीत सिंह इस यात्रा के प्रमुख नेतृत्वकर्ता हैं। उनके साथ तरावड़ी के संधू माजरा खाप के प्रधान गुरविंदर सिंह संधू, हरकीरत सिंह (कुरुक्षेत्र), नवजोत सिंह (सुपरवाइजर), गुलाब सिंह (मुनक), मोहनजीत सिंह (पानीपत), करनैल सिंह (निम्नाबाद) और गुरदयाल सिंह (संत भवन इसराना साहिब) भी शामिल रहे। सभी ने मिलकर यात्रा के सुचारू संचालन और धार्मिक संदेशों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यात्रा में शामिल संगत ने शहरवासियों को गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान और मूल्यों के बारे में जागरूक करने का आह्वान किया। यात्रा कई प्रमुख स्थानों से गुजरते हुए आगे बढ़ी और रास्ते में स्थानीय लोगों ने इसका स्वागत किया।

गुरु तेग बहादुर को बताया मानवता का प्रकाश स्तंभ
धर्म प्रचार कमेटी के प्रधान गुरमीत सिंह ने कहा कि गुरुतेग बहादुर जी सम्पूर्ण मानवता के प्रकाश स्तंभ थे। वे धार्मिक स्वतंत्रता, मानवाधिकार और न्याय के रक्षक थे। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब का जीवन करुणा, त्याग और समर्पण का जो उदाहरण प्रस्तुत करता है, वही आज भी दुनिया को सही राह दिखाता है।
उन्होंने बताया कि यह ‘हिंद की चादर’ यात्रा समाज में भाईचारे, आपसी सम्मान और सभी धर्मों के प्रति सद्भाव का संदेश लेकर निकाली गई है। यात्रा का मूल उद्देश्य यह बताना है कि गुरु तेग बहादुर जी ने अपने प्राणों का बलिदान केवल सिखों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे हिंदुस्तान की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए दिया था।
हिंद की चादर’ के रूप में मनाया जाता है शहीदी दिवस
गुरमीत सिंह ने कहा कि गुरुतेग बहादुर जी के शहीदी दिवस को ‘हिंद की चादर’ के नाम से श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। यह 350वां शहीदी वर्ष सिख इतिहास का अत्यंत प्रेरणादायक अध्याय है, जिसमें पूरे विश्व में गुरुसाहिब के उपदेशों को याद किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस प्रकार की यात्राएँ नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने का माध्यम हैं। इससे युवा यह सीखते हैं कि धर्म, सत्य और मानवता की रक्षा के लिए गुरु साहिब ने किस तरह त्याग और बलिदान का मार्ग अपनाया।
इसराना साहिब से रवाना हुई यह यात्रा आने वाले दिनों में हरियाणा के कई जिलों से होकर गुजरेगी और अलग-अलग गुरुद्वारों में संगत को गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाओं से परिचित कराएगी।
