हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक नई गंभीर स्थिति सामने आई है। राज्य के चार जिलों—फतेहाबाद, रोहतक, पंचकूला और पानीपत में फार्मासिस्टों की अनुपस्थिति का मामला उजागर हुआ है। इसके बाद स्वास्थ्य निदेशालय तुरंत हरकत में आया और डीजी हेल्थ डॉ. मनीष बंसल ने संबंधित जिलों के सिविल सर्जनों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
डीजी हेल्थ ने स्पष्ट कहा कि फार्मासिस्टों के गायब रहने और डाटा एंट्री ठीक से न करने की वजह से दवा सप्लाई और टीबी उपचार दोनों पर गंभीर असर पड़ रहा है। ऐसे मामलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
काम प्रभावित न हो, इसलिए दिए आदेश
फार्मासिस्टों की अनुपस्थिति के कारण अस्पतालों का कार्य बाधित न हो, इसके लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है—
👉 जिला औषधि भंडारों का प्रभार जनरल हेल्थ सिस्टम के फार्मासिस्टों को सौंपने के निर्देश जारी किए गए हैं।
डीजी हेल्थ ने बताया कि औषधि भंडारण से वितरण तक सभी कार्य सुचारू रूप से चलना जरूरी है। इसलिए जिन जिलों में फार्मासिस्ट मौजूद नहीं हैं, वहाँ अस्थायी व्यवस्था तुरंत लागू की जा रही है।
टीबी दवाओं की सप्लाई पर पड़ा असर
केंद्रीय टीबी प्रभाग ने हरियाणा की अधूरी और धीमी डाटा एंट्री पर नाराजगी जाहिर की है।
टीबी दवाओं का आवंटन पोर्टल पर दर्ज स्टॉक के आधार पर ही होता है। लेकिन—
❗ कई जिलों ने समय पर स्टॉक अपडेट नहीं किया
❗ पोर्टल पर रजिस्टर और भौतिक स्टॉक में बड़ा अंतर मिला
❗ परिणामस्वरूप टीबी दवाओं की सप्लाई प्रभावित हो गई
डीजी ने चेतावनी देते हुए कहा—
“DVDMS डेटा अपडेट न होने का सीधा असर टीबी मरीजों को मिलने वाली दवाओं पर पड़ेगा।”
इसलिए सभी जिलों को तुरंत स्टॉक रिकॉर्ड अपडेट करने का आदेश दिया गया है।

कंप्यूटर–प्रिंटर उपस्थित, फिर भी काम धीमा
डीजी हेल्थ ने बताया कि सभी जिला टीबी केंद्रों पर—
- कंप्यूटर
- प्रिंटर
- इंटरनेट
पहले से उपलब्ध हैं।
इसके बावजूद डाटा एंट्री धीमी है, जो स्वास्थ्य सिस्टम की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है। जिलों को निर्देश दिया गया है कि—
✔ भौतिक स्टॉक
✔ पोर्टल स्टॉक
✔ रजिस्टर स्टॉक
तीनों में एकरूपता रहनी चाहिए।
फार्मासिस्टों की जिम्मेदारियां और लापरवाही
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत फार्मासिस्टों को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं:
🔹 प्रमुख जिम्मेदारियां
- जिला औषधि भंडार का प्रभार संभालना
- दवा स्टॉक रजिस्टर का रखरखाव
- स्टॉक की उपलब्धता सुनिश्चित करना
- पोर्टल पर सभी प्रविष्टियां समय पर दर्ज करना
- टीयू व पीएचआई स्तर के भंडारों का निरीक्षण
- दवाओं के एक्सपायरी मैनेजमेंट की मॉनिटरिंग
- निजी अस्पतालों में टीबी नोटिफिकेशन के बाद दवाओं की आपूर्ति
- निक्षय पोर्टल पर डाटा अपडेट
- फील्ड टीम की सहायता
लेकिन फार्मासिस्टों की गैरमौजूदगी और लापरवाही से ये सभी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी चेतावनी
चार जिलों में फार्मासिस्टों का गायब होना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं है, बल्कि यह रोगियों की जान को जोखिम में डालने वाला मामला है।
डाटा एंट्री गड़बड़ होने से टीबी मरीजों को दवाएं नहीं मिल पा रहीं, जो एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का संकेत है।
स्वास्थ्य विभाग अब सख्त रुख में है और आने वाले दिनों में इन जिलों में कार्रवाई की संभावना भी है।
