हरियाणा में अवैध प्रवासन और तथाकथित ‘डंकी रूट’ के लगातार बढ़ते मामलों पर आखिरकार सरकार सख्त होती नजर आ रही है। प्रदेश सरकार ने ऐसे मामलों की सुनवाई और पीड़ितों को राहत देने के लिए जिलों में अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) को लोकपाल के रूप में नामित कर दिया है। इसके साथ ही उपायुक्तों (DC) को ट्रैवल एजेंटों के पंजीकरण का अधिकार सौंपा गया है।
हालांकि, इस फैसले को लेकर सरकार पर देरी के आरोप भी लग रहे हैं, क्योंकि हरियाणा ट्रैवल एजेंट रजिस्ट्रेशन एवं विनियमन अधिनियम, 2025 को करीब आठ महीने पहले ही नोटिफाई किया जा चुका था, लेकिन अब जाकर इसके क्रियान्वयन की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।
अमेरिका से डिपोर्ट हुए सैकड़ों युवा, बढ़ी चिंता
हाल के महीनों में अमेरिका से सैकड़ों भारतीय युवाओं को डिपोर्ट किया गया है, जिनमें बड़ी संख्या हरियाणा के युवाओं की है। इन युवाओं ने लाखों रुपये खर्च कर अवैध तरीकों से ‘डंकी रूट’ के जरिए अमेरिका में प्रवेश किया था। डिपोर्टेशन के बाद इन युवाओं और उनके परिवारों की आर्थिक व सामाजिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है, जिससे सरकार पर दबाव और बढ़ गया।

9 अप्रैल को नोटिफाई हुआ था कानून, नियम अब भी लंबित
हरियाणा ट्रैवल एजेंट रजिस्ट्रेशन एवं विनियमन अधिनियम, 2025 को सरकार ने 9 अप्रैल 2025 को नोटिफाई किया था। हालांकि, इस अधिनियम के तहत आवश्यक नियम (Rules) अब तक नोटिफाई नहीं किए गए हैं। इसके बावजूद सरकार ने गृह विभाग के जरिए 11 दिसंबर को आदेश जारी कर प्रशासनिक व्यवस्था लागू कर दी है।
ADC होंगे लोकपाल, DC के पास रजिस्ट्रेशन की पावर
गृह विभाग के आदेश के अनुसार, प्रत्येक जिले में अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) को लोकपाल के रूप में नामित किया गया है। वे ट्रैवल एजेंटों की चूक से पीड़ित लोगों की शिकायतों की सुनवाई करेंगे। वहीं, उपायुक्त (DC) अपने-अपने जिलों में ट्रैवल एजेंटों के पंजीकरण के लिए सक्षम प्राधिकारी होंगे।
पुलिस को भेजे जा सकेंगे मामले
अधिनियम की धारा 15 के तहत, यदि किसी ट्रैवल एजेंट की वजह से कोई व्यक्ति ठगा गया है या उसे नुकसान पहुंचा है, तो वह लोकपाल के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकता है। लोकपाल मामले की जांच कर उचित कदम उठाएगा और जरूरत पड़ने पर मामले को संबंधित पुलिस प्राधिकरण को भी भेज सकता है।
बिना रजिस्ट्रेशन काम करना गंभीर अपराध
अधिनियम के तहत अब ट्रैवल एजेंट का पेशा अपनाने के लिए डीसी से पंजीकरण प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए निर्धारित दस्तावेज जमा करने होंगे और पुलिस सत्यापन भी जरूरी होगा।
बिना पंजीकरण के ट्रैवल एजेंट का काम करना धारा 4 के तहत दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर कम से कम 2 साल की जेल, जिसे 7 साल तक बढ़ाया जा सकता है, और 2 लाख से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
पंजीकरण रद्द करने का भी अधिकार
धारा 7 के तहत उपायुक्त को ट्रैवल एजेंट का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार दिया गया है। यदि कोई एजेंट मानव तस्करी, जाली दस्तावेज बनाने, आपराधिक गतिविधियों में शामिल पाया जाता है या भारत की सुरक्षा और हितों के खिलाफ काम करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अपील की व्यवस्था भी मौजूद
यदि कोई ट्रैवल एजेंट डीसी के फैसले से असंतुष्ट है, तो वह 90 दिनों के भीतर अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है। गृह विभाग ने संभागीय आयुक्तों को अपीलीय प्राधिकारी के रूप में नामित किया है।
क्यों जरूरी हुआ सरकार का यह फैसला?
सरकार के इस फैसले की सबसे बड़ी वजह हरियाणा में अवैध प्रवासन के मामलों में लगातार इजाफा है। आंकड़ों के मुताबिक, 20 जनवरी से 22 जुलाई 2025 के बीच अमेरिका से 1,703 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया गया, जिनमें 604 हरियाणा के निवासी हैं।
इसके अलावा, हरियाणा पुलिस की वेबसाइट के अनुसार, प्रदेश में फिलहाल 188 ट्रैवल एजेंट अवैध रूप से लिस्टेड हैं। 2019 में गठित एसआईटी के बाद से सितंबर 2025 तक ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ 3,455 मामले दर्ज हुए, 3,053 गिरफ्तारियां हुईं और 52.06 करोड़ रुपये की रिकवरी की गई।
आने वाले समय में और सख्ती के संकेत
सरकार का मानना है कि यह कदम अवैध प्रवासन, मानव तस्करी और युवाओं के शोषण पर रोक लगाने में अहम साबित होगा। आने वाले समय में नियमों को नोटिफाई कर इस कानून को और सख्ती से लागू किए जाने के संकेत भी दिए जा रहे हैं।
