हरियाणा बीजेपी में इन दिनों संगठन और नेताओं के बीच विवाद की लहर देखने को मिल रही है। प्रदेश के पांच जिलाध्यक्षों के खिलाफ बगावत की आवाजें उठ रही हैं, और इनकी शिकायत प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली तक पहुंच गई है। गोहाना, भिवानी, फतेहाबाद, जींद के बाद अब रोहतक जिलाध्यक्ष रणबीर ढाका के खिलाफ ताजा मामला सामने आया है।
रोहतक में चिट्ठी वायरल
रोहतक भाजपा के पदाधिकारियों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, CM और अन्य बड़े पदाधिकारियों को चिट्ठी भेजी है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसमें आरोप लगाया गया कि जिलाध्यक्ष रणबीर ढाका पार्टी में कांग्रेसी बैकग्राउंड वालों को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे भाजपा का संगठन कमजोर हो रहा है।
चिट्ठी में बताया गया कि रणबीर ढाका का राजनीतिक इतिहास अवसरवादी रहा है। पहले इनेलो और कांग्रेस में सक्रिय रहे रणबीर ढाका ने 2014 में भाजपा में प्रवेश किया। उन्होंने तत्कालीन जिला अध्यक्ष अजय बंसल के माध्यम से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंच बनाई और निजी “B” टीम तैयार करने के उद्देश्य से रोहतक का जिलाध्यक्ष पद हासिल किया।
आयु सीमा और चुनाव में हार

चिट्ठी में यह भी कहा गया कि उनकी नियुक्ति बीजेपी नियमों के विपरीत है, क्योंकि जिलाध्यक्ष की आयु सीमा 45 से 55 वर्ष है, जबकि रणबीर ढाका 60 वर्ष से अधिक के हैं।
इसके अलावा, 2024 के लोकसभा चुनाव में रोहतक सीट पर भाजपा को रिकॉर्ड अंतर से हार का सामना करना पड़ा। उसी साल विधानसभा चुनाव में भी गलत रणनीतियों के कारण भाजपा रोहतक में कोई सीट नहीं जीत पाई।
गोहाना, भिवानी और फतेहाबाद के मामले
- गोहाना: जिलाध्यक्ष बिजेंद्र मलिक के खिलाफ चिट्ठी वायरल हुई, जिसमें आरोप थे कि उन्होंने BJJP और कांग्रेस समर्थकों को बढ़ावा दिया।
- भिवानी: जिलाध्यक्ष वीरेंद्र कौशिक पर केवल दो विधानसभा हलकों से पदाधिकारी चुनने और जाटों की अनदेखी करने का आरोप है।
- फतेहाबाद: जिलाध्यक्ष प्रवीण जोड़ा और पूर्व विधायक दूड़ाराम समर्थकों के बीच विवाद सोशल मीडिया तक पहुँच गया। अगस्त में पार्टी के एक कार्यक्रम में केवल पूर्व विधायक का संबोधन दिखाने को अनुशासनहीन माना गया।
शिकायत का विस्तार
रोहतक में भेजी गई चिट्ठी में 16 पन्नों का विवरण था। इसमें चार पन्नों पर जिलाध्यक्ष के खिलाफ आरोप और कार्यकर्ताओं की पीड़ा लिखी गई, जबकि बाकी 11 पन्नों पर 200 से अधिक पदाधिकारियों और वर्करों के हस्ताक्षर थे।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और संगठन पर प्रभाव
बीजेपी के भीतर यह विवाद संगठन की रीति-नीति और स्थिरता पर असर डाल सकता है। वायरल चिट्ठियों के बाद नेताओं ने खुलकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। बताया जा रहा है कि पार्टी के दबाव में कई नेता बैकफुट पर आ गए हैं।
हरियाणा बीजेपी में इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि कई जिलाध्यक्ष संगठन के हितों से अधिक निजी राजनीति और राजनीतिक आकांक्षाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। आगामी चुनाव और संगठनात्मक कार्यों पर इसका असर पड़ने की संभावना है।
