गुरुग्राम में लीवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक 25 वर्षीय युवक संजू ने शनिवार देर रात अपने किराए के मकान में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक संजू मूल रूप से मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के पिपरिया गांव के रहने वाले थे और वर्तमान में गुरुग्राम के पालम विहार इलाके में किराए के मकान में रह रहे थे।
परिवार और पड़ोसियों ने बताया कि संजू पिछले कई महीनों से लीवर और पेट से संबंधित गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। बीमारी के कारण उन्हें लगातार शारीरिक दर्द का सामना करना पड़ रहा था और आर्थिक तंगी भी थी। करीब दो महीने पहले संजू को अपनी तबीयत बिगड़ने के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी थी, जिससे परिवार का रोजमर्रा का खर्च चलाना और भी कठिन हो गया।
शनिवार रात संजू अपने कमरे में फंदे पर लटक गए। उनकी मां, जो घर लौट रही थीं, ने देखा कि दरवाजा अंदर से बंद है। बार-बार आवाज देने के बावजूद कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद उन्होंने पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़ा, तो संजू का शव फंदे पर लटका हुआ मिला। पड़ोसियों और परिजनों ने उन्हें तुरंत नजदीकी निजी अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस अधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखा और रविवार को पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
संजू की मां ने बताया कि उनका बेटा अक्सर कहता था, “मां, मैं अब ठीक नहीं हो पाऊंगा।” उन्होंने अपनी मां को कई बार अपनी तकलीफ बताई थी, लेकिन अंदर ही अंदर मानसिक रूप से टूटते रहे। पड़ोसियों का कहना है कि संजू स्वभाव से बहुत शांत और मिलनसार थे।
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में ऐसा प्रतीत होता है कि संजू की आत्महत्या उनकी गंभीर बीमारी और आर्थिक एवं मानसिक तनाव के कारण हुई। जांच अधिकारी ने बताया कि परिजनों से बयान लिए जा रहे हैं और पूरे मामले की गहन जांच जारी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर शारीरिक बीमारी के कारण लंबे समय तक मानसिक तनाव और डिप्रेशन होना आम है। ऐसे मामलों में परिवार और समाज का सहयोग बेहद जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति लगातार मानसिक दबाव और बीमारी के कारण परेशान है, तो उसे समय पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या काउंसलर से मदद लेना चाहिए।
संजू के परिवार ने अब उनका अंतिम संस्कार मध्य प्रदेश में किया। इस दुखद घटना ने एक बार फिर से मानसिक स्वास्थ्य और गंभीर बीमारियों से जुड़े दबाव के प्रति समाज को सचेत किया है।
यह घटना उन युवाओं और परिवारों के लिए एक चेतावनी भी है, जो बीमारी और आर्थिक कठिनाइयों के चलते मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं। समाज और परिवार को ऐसे लोगों के प्रति संवेदनशील रहना और उन्हें सहयोग देना जरूरी है ताकि इस तरह के दुखद मामलों को रोका जा सके।
