दिल्ली के नजदीक स्थित फरीदाबाद के धौज और फतेहपुर तगा इलाके में दो अलग-अलग मकानों से कुल 2900 किलो विस्फोटक बरामद हुआ है। यह पूरी साजिश ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ का हिस्सा बताई जा रही है, जिसमें समाज के भरोसेमंद चेहरे शामिल थे।
पुलिस ने पुष्टि की है कि इस मामले में डॉ. आदिल अहमद राठर, डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई (उर्फ मुजम्मिल शकील) और लेडी डॉक्टर शाहीन शाहिद को गिरफ्तार किया गया है। सभी आरोपी अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं, जिसे गल्फ फंडिंग से स्थापित बताया जा रहा है। यूनिवर्सिटी ने मीडिया की एंट्री रोक दी है और कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया।
प्रारंभिक जांच में पता चला कि राजधानी दिल्ली में बड़ा आतंकी हमला करने की साजिश रची जा रही थी। आरोपी धौज और फतेहपुर तगा में किराए के मकानों में अमोनियम नाइट्रेट, असॉल्ट राइफलें, पिस्टल, कारतूस, टाइमर, रिमोट, वॉकी-टॉकी और आईईडी बनाने का सामान जमा कर रहे थे। इतनी मात्रा में विस्फोटक से लगभग 400-450 शक्तिशाली IED तैयार किए जा सकते थे।

फरीदाबाद पुलिस कमिश्नर के अनुसार, यह ऑपरेशन लगभग 15 दिन से चल रहा था। धौज में मुजम्मिल के कमरे से 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट और हथियार बरामद हुए। वहीं फतेहपुर तगा के घर से अतिरिक्त 2563 किलो अमोनियम नाइट्रेट और विस्फोटक सामग्री मिली।
लेडी डॉक्टर शाहीन शाहिद को भी गिरफ्तार किया गया, जो मुजम्मिल की सहयोगी और कथित गर्लफ्रेंड हैं। वह जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े मॉड्यूल की लॉजिस्टिक सपोर्ट में शामिल थीं। पुलिस ने बताया कि शाहीन इस नेटवर्क की आठवीं सदस्य थी।
धौज में जिस घर से विस्फोटक बरामद हुआ, वह बिल्डिंग मटेरियल विक्रेता इकबाल का था, जबकि फतेहपुर तगा का कमरा मेवात के किसी इमाम का था। पुलिस ने मौके से संदिग्धों और सामान को कब्जे में लिया।
अल-फलाह विश्वविद्यालय का इतिहास भी संदिग्ध है। इसे अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा 1997 से कॉलेज चलाने के बाद 2014 में निजी विश्वविद्यालय का दर्जा मिला। यूनिवर्सिटी में मीडिया को रोकने और छात्रों से किसी भी तरह की पूछताछ से बचने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पुलिस की जांच जारी है और सभी आरोपियों से कस्टोडियल इंटरोगेशन लिया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे दिल्ली-NCR में सतर्क हैं, ताकि किसी बड़े हमले को रोका जा सके।
