Wednesday, April 1, 2026
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दिल्ली ब्लास्ट मामले में डॉ. मुजम्मिल और मौलवी इश्तियाक का आतंकी नेटवर्क, मदरसे में बच्चों की तालीम की आड़ में अवैध निर्माण

दिल्ली ब्लास्ट केस में नया खुलासा: डॉ. मुजम्मिल और मौलवी इश्तियाक का आतंकी नेटवर्क

दिल्ली ब्लास्ट मामले की जांच में अब फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी से मात्र 700 मीटर दूरी पर एक अंडर ग्राउंड इमारत और मदरसा पाया गया। इस परिसर को डॉ. मुजम्मिल शकील द्वारा संचालित आतंकी नेटवर्क के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

जांच के अनुसार, यह 200 वर्गगज में बना बेसमेंट 15-20 बच्चों को धार्मिक शिक्षा देने के लिए तैयार किया जा रहा था। इस प्लॉट की पावर ऑफ अटॉर्नी यूनिवर्सिटी की मस्जिद के इमाम मोहम्मद इश्तियाक के नाम पर थी, जबकि फंडिंग पूरी तरह डॉ. मुजम्मिल द्वारा की जा रही थी। पानी की व्यवस्था के लिए डॉ. मुजम्मिल ने इमाम को ऑनलाइन 35 हजार रुपए ट्रांसफर किए थे।

मदरसे का निर्माण और अवैध कॉलोनी
जांच टीम ने पाया कि यह कॉलोनी अवैध थी और निर्माण के लिए कोई सरकारी मंजूरी नहीं ली गई थी। बेसमेंट का निर्माण आधा अधूरा था, लेकिन इसमें वेंटिलेशन और पंखों की व्यवस्था की गई थी। आसपास के लोगों ने बताया कि मदरसे में करीब 15-20 बच्चे मुफ्त धार्मिक शिक्षा के लिए आते थे। इमाम मोहम्मद इश्तियाक का इरादा बच्चों को तालीम देने का अच्छा लग रहा था, लेकिन यह स्थल आतंकी गतिविधियों के लिए भी इस्तेमाल हो रहा था।

इश्तियाक का संदिग्ध कनेक्शन
इश्तियाक पिछले 20 वर्षों से फरीदाबाद में रह रहे थे और यूनिवर्सिटी की मस्जिद में धार्मिक कक्षाएं संचालित करते थे। डॉ. मुजम्मिल ने उनसे दोस्ती कर फतेहपुर तगा गांव में उनका कमरा किराए पर लिया। इसी कमरे में 2,563 किग्रा विस्फोटक सामग्री स्टोर की गई थी, जो यूनिवर्सिटी से महज 4 किलोमीटर दूर थी। इश्तियाक को 13 नवंबर को गिरफ्तार किया गया और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उनकी हिरासत 7 दिनों के लिए बढ़ा दी।

डॉक्टर-मौलवी आतंकी मॉड्यूल का शक
जांच अधिकारी का कहना है कि यह मॉड्यूल Jaish-e-Mohammed (JeM) से जुड़ा ‘डॉक्टर-मौलवी’ नेटवर्क हो सकता है, जो रेडिकलाइजेशन के नए तरीके दिखाता है। इश्तियाक और डॉ. मुजम्मिल के संबंधों की गहन जांच की जा रही है। इसके अलावा, शोपियां, जम्मू-कश्मीर से मौलवी इरफान अहमद को भी गिरफ्तार किया गया है।

आर्थिक लेन-देन और वित्तीय जाल
डॉ. मुजम्मिल ने इश्तियाक को ऑनलाइन फंड ट्रांसफर कर मदरसे का निर्माण करवाया। इश्तियाक को यूनिवर्सिटी से 10 हजार रुपए मासिक पगार मिलता था। इससे पहले उनका पगार सिर्फ 2 हजार रुपए था। वहीं इश्तियाक के पास पहले से फतेहपुर तगा में प्लॉट था, जिस पर वह मकान बना चुके थे।

जांच और आगे की रणनीति
जम्मू-कश्मीर पुलिस डॉ. मुजम्मिल और मौलवी इश्तियाक के नेटवर्क का पूरा ट्रैक कर रही है। एजेंसियां यह पता लगाने में लगी हैं कि यूनिवर्सिटी और आसपास के छात्रों, स्टाफ तथा अन्य लोगों से इनका संपर्क कैसा था। विस्फोटक सामग्री और आर्थिक लेन-देन की पूरी जाँच जारी है।

Sonu Baali
Sonu Baalihttp://khasharyananews.com
संस्थापक, खास हरियाणा न्यूज़- हरियाणा की ज़मीन से जुड़ा एक निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकार। पिछले 6+ वर्षों से जनता की आवाज़ को बिना किसी एजेंडे के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। देसी अंदाज़ और सच्ची पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। 🌐 khasharyana.com
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