चंडीगढ़ का विवाद दशकों पुराना है। जानें क्यों पंजाब और हरियाणा दोनों इसे अपनी राजधानी मानते हैं, इतिहास, राजनीतिक संघर्ष और हाल की घटनाओं के साथ।

आख़िर चंडीगढ़ किसका है! पंजाब या हरियाणा?
दुनिया में जहाँ दो लोग एक ही ज़मीन को अपना कहते हैं… वहाँ सिर्फ़ सरहदें नहीं, जज़्बात भी बँट जाते हैं। और यही कहानी है इस ज़मीन की —जो एक तरफ़ ‘हक़’ कहलाती है… और दूसरी तरफ़ ‘हकूमत’। हक और हकूमत अक्सर साथ नहीं चलते।
जिनके पास हक होता है उनके पास हुकूमत नहीं होती और जिनके पास हुकूमत होती है, वो अक्सर दूसरों के हकों पर राज करता है। फिर चाहे वह रूस और यूक्रेन का युद्ध हो, भारत और चीन का सीमा विवाद हो, भारत और पाकिस्तान का कश्मीर टकराव हो, इज़राइल और फ़िलिस्तीन की जंग, चीन और ताइवान का तनाव, उत्तर और दक्षिण कोरिया, रूस और जापान या आर्मेनिया और अज़रबैजान का संघर्ष ही क्यों न हो — जब बात ज़मीन की होती है, तो सरहदें और सख़्त हो जाती हैं और समझौते कमजोर पड़ जाते हैं।
और अब वही कहानी भारत के दिल में है, जहाँ हरियाणा और पंजाब दोनों एक ही शहर को चाहते हैं। हम बात करेंगे The City Beautiful चंडीगढ़ की, जिसे ट्राई सिटी भी कहा जाता है, जो दो राज्यों का सपना है लेकिन अधूरी कहानी भी।
इसकी खूबसूरती के पीछे छुपी सियासत, संघर्ष और पहचान की लंबी कहानी है। यह वही अधूरी कहानी है, जिसे आज भी पंजाब और हरियाणा अपने-अपने नजरिए से पढ़ते हैं।
चंडीगढ़ का इतिहास और भौगोलिक स्थिति
राजधानी किसी भी राज्य का दिल होती है और फिर दो इंसान हो या राज्य, जब एक ही दिल को चाहेंगे तो टकराव होना लाजमी है।
चंडीगढ़ का अर्थ है देवी चंडी का किला, जिसका नाम पास के मणिमाजरा स्थित प्रसिद्ध चंडी मंदिर से लिया गया है। लगभग 114 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला यह शहर कभी आधुनिक भारत की योजना का प्रतीक था लेकिन आज दो राज्यों की खींचतान का केंद्र बन चुका है।
चंडीगढ़ हिमालय की सबसे निचली पर्वत श्रृंखला शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में बसा है, जो हिमालयी क्षेत्र का प्रवेश द्वार माना जाता है। चंडीगढ़ के पूर्व में हरियाणा और बाकी दिशाओं में पंजाब स्थित है। यह सुखना और पटियाली नदियों के बीच, उपजाऊ मैदानी क्षेत्र में बसा है, जहाँ गेहूँ, मक्का और धान जैसी फसलें उगाई जाती हैं।
चंडीगढ़ की स्थापना और वास्तुकला
बंटवारे के बाद भारतीय पंजाब की राजधानी के लिए कई शहरों पर विचार हुआ — अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, शिमला, अंबाला और करनाल। अंततः 1948 में चंडीगढ़ को पंजाब की नई राजधानी के रूप में चुना गया।
उम्मीद थी कि हिमालय की तलहटी में बसाया गया यह नया शहर न केवल आधुनिकता और पुनर्निर्माण का प्रतीक बनेगा, बल्कि विभाजन के घावों से जूझ रहे पंजाबियों के आत्मसम्मान को भी पुनर्जीवित करेगा।
इस परियोजना में महान वास्तुकार ले कोर्बुज़िए (Le Corbusier) के साथ ब्रिटेन के आर्किटेक्ट मैक्सवेल फ्राय (Maxwell Fry) और उनकी पत्नी जेन ड्रू (Jane Drew) शामिल थे। 1950 के दशक में निर्माण कार्य शुरू हुआ और 1960 तक शहर का स्वरूप आकार लेने लगा।
चंडीगढ़ 60 सुव्यवस्थित आयताकार सेक्टरों में विभाजित है। दिलचस्प बात यह है कि पश्चिमी मान्यताओं के कारण सेक्टर 13 का निर्माण नहीं किया गया क्योंकि इसे अशुभ माना जाता था।
राजनीतिक विवाद और साझा राजधानी
1947 में स्वतंत्रता के बाद, शिमला को अस्थायी रूप से पंजाब की राजधानी बनाया गया। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू चाहते थे कि लाहौर के स्थान पर एक आधुनिक शहर पंजाब की राजधानी बने।
28 मार्च 1948 को खरड़ क्षेत्र के 22 गाँव अधिग्रहित किए गए और 36 अन्य प्रभावित हुए। इस परियोजना के चलते करीब 21,000 लोग पुनर्वासित हुए।
21 सितंबर 1953 को शिमला से चंडीगढ़ में पंजाब की राजधानी स्थानांतरित हुई। राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 7 अक्टूबर 1953 को औपचारिक उद्घाटन किया।
1966 में हरियाणा के गठन के बाद चंडीगढ़ को दोनों राज्यों की साझा राजधानी घोषित किया गया। 1970 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने प्रशासनिक प्रतिनिधित्व तय किया: पंजाब 60% और हरियाणा 40%।
आंदोलन और संघर्ष
15 अगस्त 1969 को दरशन सिंह फिरूमन ने चंडीगढ़ और पंजाबी भाषी क्षेत्रों को पंजाब में मिलाने की मांग को लेकर अनशन शुरू किया। 74वें दिन, 27 अक्टूबर 1969 को उन्होंने प्राण त्याग दिए।
संत फतेह सिंह ने चेतावनी दी कि यदि चंडीगढ़ बिना शर्त पंजाब को नहीं दिया गया तो 1 फरवरी 1970 को वे आत्मदाह करेंगे। हरियाणा के एक्टिविस्ट के.के. तूफ़ान ने भी यही धमकी दी।
इंदिरा गांधी ने संतुलित प्रस्ताव पेश किया: चंडीगढ़ पंजाब को और 20 करोड़ रुपये हरियाणा को नई राजधानी के लिए। इसमें 10 करोड़ अनुदान और 10 करोड़ लोन था।
समझौते और राजनीतिक जटिलता
राजीव गांधी और अकाली दल के हरचंद सिंह लोंगोवाल के बीच 24 जुलाई 1985 को समझौता हुआ। इसके तहत 26 जनवरी 1986 से चंडीगढ़ पंजाब को हस्तांतरित होना था और पंजाब के हिन्दीभाषी इलाके हरियाणा को।
लेकिन 20 अगस्त 1985 को लोंगोवाल की हत्या के कारण यह समझौता अधूरा रह गया।
1985 के बाद किसी भी सत्ताधारी पार्टी ने स्थायी समाधान का प्रयास नहीं किया। पंजाब में उग्रवाद 1990 के मध्य तक जारी रहा।
हरियाणा की रणनीति और विकास
हरियाणा के बंसीलाल ने पंचकुला के पास घग्गर नदी पर पुल बनवाया, जो राज्य के पिछड़े हिस्सों को जोड़ता है। यह पुल आज बंसीलाल हाईवे के नाम से जाना जाता है।
7 अक्टूबर 1971 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसका उद्घाटन किया।
हाल की घटनाएं
केंद्र सरकार के 4 नवंबर 2025 के नोटिफिकेशन ने पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट और सिन्डिकेट को भंग कर दिया। इसके विरोध में 10 नवंबर को चंडीगढ़ में बड़ी महापंचायत हुई।
निष्कर्ष
चंडीगढ़ का विवाद दशकों पुराना है। यह शहर पंजाब और हरियाणा दोनों के लिए ऐतिहासिक, राजनीतिक और भावनात्मक महत्व रखता है। सवाल अब भी वही है — क्या टकराव की राजनीति में उलझे रहेंगे या स्थायी समाधान निकालेंगे?
