हिसार: पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता बृजेंद्र सिंह की सद्भाव यात्रा शुक्रवार 25 अक्टूबर को हिसार जिले के उकलाना हलके में पहुंची। इस दौरान हजारों ग्रामीणों, युवाओं, महिलाओं और किसानों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
यात्रा के 21वें दिन का आगाज खेदड़ बस अड्डे से हुआ। यात्रा बालक चौपटा, बालक गांव, पाबड़ा और कनोह होते हुए अग्रोहा पहुंची, जहां रात्रि विश्राम किया गया। ग्रामीणों ने जगह-जगह फूल बरसाकर और नारे लगाकर एकजुटता का संदेश दिया।
बीरेंद्र सिंह बोले – भाईचारा ही समाज की असली पूंजी
पाबड़ा गांव में आयोजित जनसभा में पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ. बीरेंद्र सिंह ने कहा कि “भाईचारा ही समाज की असली पूंजी है।”
उन्होंने कहा कि समाज तब तक मजबूत रहेगा जब तक लोग एक-दूसरे का हाथ थामे रहेंगे।
उन्होंने चेताया कि कुछ ताकतें समाज में अविश्वास और दूरी पैदा करने का प्रयास कर रही हैं, जिसे रोकना जरूरी है।
बीरेंद्र सिंह ने कहा कि राजनीति बदलती रहती है, लेकिन रिश्ते, सम्मान और सामाजिक समरसता हमेशा टिकाऊ मूल्य हैं।
समाज को जोड़ने के उद्देश्य से निकली यात्रा – बृजेंद्र सिंह

बृजेंद्र सिंह ने कहा कि सद्भाव यात्रा किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और संवाद बढ़ाने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि “जो लोग समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें समझना होगा कि हरियाणा की जड़ें बहुत गहरी हैं — यहां किसान, मजदूर, व्यापारी और युवा एकजुट हैं।”
बृजेंद्र सिंह ने कहा कि “2024 की गलती दोहराने से पहले आत्ममंथन जरूरी है। अगर समाज को पहले ही जोड़ा गया होता, तो आज स्थितियां और बेहतर होतीं।”
यात्रा को मिल रहा जनसमर्थन
कांग्रेस नेता उदयवीर पूनिया ने कहा कि हरियाणा के कोने-कोने से यात्रा को जो समर्थन मिल रहा है, वह इस बात का प्रमाण है कि जनता अब विभाजन की राजनीति से ऊपर उठ चुकी है।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा सत्ता के लिए नहीं, बल्कि समाज के आत्म-सम्मान और संवाद की पुनर्स्थापना के लिए निकली है।
यात्रा के दौरान बृजेंद्र सिंह गांव-गांव जाकर जनता से संवाद कर रहे हैं, उनकी समस्याएं सुन रहे हैं और सकारात्मक समाधान की दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं।
‘सद्भाव यात्रा’ के उद्देश्य
- हरियाणा में सामाजिक एकता और भाईचारे की परंपरा को सशक्त करना।
- किसान, मजदूर, महिला, युवा और व्यापारी वर्गों को साझा मंच पर लाना।
- समाज में पारस्परिक विश्वास और सम्मान की भावना को पुनर्जीवित करना।
- विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा देना।
