हिसार जिले के आदमपुर में अखिल भारतीय किसान सभा तहसील कमेटी का धरना सोमवार को लगातार 36वें दिन भी जारी रहा। तहसील परिसर में चल रहे इस धरने की अध्यक्षता छोटूराम फगेडिया और कॉमरेड सरन कुमार ने संयुक्त रूप से की। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो आंदोलन को और अधिक निर्णायक व व्यापक रूप दिया जाएगा।
किसानों की प्रमुख मांगें
धरने में मौजूद किसान नेताओं ने कहा कि जलभराव, सेम तथा अतिवृष्टि के कारण फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं, ऐसे में सरकार को तुरंत सर्वे कर मुआवजा तथा बीमा राशि जारी करनी चाहिए।
उन्होंने अपनी प्रमुख मांगें इस प्रकार रखीं—
- जलभराव व सेमग्रस्त क्षेत्रों की फसलों का विशेष सर्वे
- अतिवृष्टि से 100% खराब फसलों का मुआवजा
- बीमा भुगतान में तेजी
- सभी फसलों की सरकारी खरीद सुनिश्चित करना
- खाद की पूरी और समय पर सप्लाई
- खेत मजदूरों को उचित मुआवजा
- मनरेगा का लंबित भुगतान
- दरक चुके मकानों और हाईटेंशन टावरों से हुए नुकसान का मुआवजा

किसानों ने कहा कि जब तक सरकार उनकी इन प्रमुख मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक धरना किसी भी हालत में समाप्त नहीं किया जाएगा।
गिरदावरी में गड़बड़ी का आरोप
तहसील सचिव सतबीर सिंह धायल ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राजस्व अधिकारियों पर गिरदावरी में नुकसान को कम दिखाने का दबाव बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा—
“खरीफ 2025 की फसल 100 प्रतिशत नष्ट हो चुकी है, लेकिन सरकार नुकसान कम दिखाकर किसानों के साथ अन्याय कर रही है।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार सेमग्रस्त भूमि को स्थाई बताते हुए मुआवजा देने से बचने की कोशिश कर रही है, जबकि इस बार फसल का नुकसान पूरी तरह से अतिवृष्टि के कारण हुआ है, न कि किसी स्थाई समस्या के कारण।
“जहां अब बिजाई संभव नहीं, वहां पूरा मुआवजा मिले”
किसानों ने जोर देते हुए कहा कि जिन खेतों में अब दोबारा बिजाई करना भी संभव नहीं है, उन किसानों को पूरा नुकसान-भरपाई दी जानी चाहिए।
किसान नेताओं का कहना है कि ऐसे क्षेत्रों में प्रभावित किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है, और सरकार को राहत राशि जल्द जारी करनी चाहिए।
धरने में कपूर सिंह बगला, मांगेराम गोदारा, रूघुबीर मण्डेरणा, अशोक सिवर और गुलाब पूनिया सहित कई किसान नेता मौजूद रहे। सभी नेताओं ने एकमत होकर कहा कि किसान की हालत पहले से ही दयनीय है, और इस समय राहत नहीं दी गई तो किसान परिवारों पर गंभीर आर्थिक संकट आ जाएगा।
सरकार को चेतावनी: “धरना रहेगा जारी”
किसान नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि—
“जब तक सरकार हमारी मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं लेती, तब तक धरना इसी तरह जारी रहेगा।”
उन्होंने कहा कि किसानों के धैर्य की परीक्षा न ली जाए, क्योंकि हालात पहले ही खराब हैं और किसान कई महीनों से नुकसान झेल रहे हैं।
धरने में शामिल किसानों ने दोहराया कि यदि प्रशासन जल्द समाधान नहीं करता, तो आंदोलन को जिला स्तर से राज्य स्तर तक बढ़ाया जाएगा।
