- गुमशुदगी के मामलों में 81% की वृद्धि
- किशोरियां और नाबालिग बच्चियां सबसे ज्यादा निशाने पर
- सोशल मीडिया और झूठे वादों से बढ़ रहा खतरा
- पुलिस की तत्परता से कई बच्चियां हुई बरामद
- सामाजिक संगठनों ने जताई गहरी चिंता
- घर के पास से हो रहे अपहरण, सीसीटीवी बने मददगार
- दो मामले जो जागरूकता की जरूरत दिखाते हैं
हरियाणा के पानीपत में महिलाओं, किशोरियों और नाबालिग बच्चियों की गुमशुदगी के मामलों में चिंताजनक वृद्धि देखने को मिल रही है। पुलिस प्रशासन की सतर्कता, जागरूकता अभियानों और तकनीकी निगरानी के बावजूद गुमशुदगी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे।
जिला अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (डीसीआरबी) के ताज़ा आंकड़े इस समस्या की गंभीरता को उजागर करते हैं।
गुमशुदगी के मामलों में 81% की वृद्धि
डीसीआरबी के अनुसार वर्ष 2020 में जिले में कुल 729 गुमशुदगी के मामले दर्ज किए गए थे। वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 1321 मामलों तक पहुंच गया।
पिछले चार सालों में इन मामलों में करीब 81 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इनमें से सबसे अधिक मामले नाबालिग बच्चियों और किशोरियों से जुड़े हैं, जिनमें से कई की तलाश अब भी जारी है।
किशोरियां सबसे ज्यादा निशाने पर
डीसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक गुमशुदा व्यक्तियों में 60 से 65 प्रतिशत तक मामले 12 से 25 वर्ष की लड़कियों और महिलाओं के हैं।
कई मामलों में प्रेम-प्रसंग, सोशल मीडिया फ्रेंडशिप, झूठे वादे, शादी का लालच या बहला-फुसलाकर अपहरण जैसी बातें सामने आई हैं।
कुछ मामलों में मानव तस्करी और जबरन मजदूरी की आशंका भी जताई गई है।
पुलिस की तत्परता से कई हुए बरामद
पानीपत पुलिस ने बताया कि मिसिंग पर्सन सेल और महिला हेल्पलाइन 1091 के माध्यम से कई नाबालिग बच्चों और महिलाओं को सफलतापूर्वक बरामद किया गया है।
डिजिटल ट्रैकिंग, सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन की मदद से तलाश में तेजी आई है।

सामाजिक संगठनों ने जताई चिंता
महिला सुरक्षा से जुड़ी संस्थाएं भी इस बढ़ते खतरे से चिंतित हैं।
नारी तू नारायणी उत्थान समिति की अध्यक्ष सविता आर्या ने कहा कि “हर महीने दर्जनों लड़कियां और महिलाएं गायब हो जाती हैं, लेकिन समाज में इस पर गंभीर चर्चा नहीं होती।”
उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान, सेफ इंटरनेट ट्रेनिंग और सेल्फ-डिफेंस कैंप नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए।
घर की दहलीज भी अब महफूज़ नहीं
अब अपराधी इतने बेखौफ हैं कि वे घर के बाहर खेल रही बच्चियों को भी निशाना बना रहे हैं।
कई मामलों में सीसीटीवी कैमरे पुलिस के लिए वरदान साबित हुए हैं, जिनकी मदद से बच्चियों को समय रहते वापस लाया जा सका है।
पुलिस लगातार उन गुमशुदा बच्चियों की तलाश में लगी है, जो अब तक नहीं मिली हैं।
दो केस जो दिखाते हैं पुलिस की सक्रियता
केस 1: मॉडल टाउन की डेढ़ साल की बच्ची
23 अक्टूबर को मॉडल टाउन क्षेत्र से एक डेढ़ साल की बच्ची को कबाड़ी बहला-फुसलाकर ले गया।
परिवार ने तुरंत पुलिस में गुमशुदगी दर्ज कराई। कुछ ही घंटों में पुलिस ने बच्ची को बरामद कर परिवार को सौंप दिया और आरोपी अजय को जेल भेज दिया गया।
केस 2: 7 साल की बच्ची का अपहरण
15 सितंबर को पुराना औद्योगिक थाना क्षेत्र से एक 7 साल की बच्ची को पड़ोसी ले गया।
परिवार ने सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंपी। पुलिस की सतर्कता से बच्ची को रात 10 बजे तक बरामद कर लिया गया।
इसी माह एक और बच्ची को पड़ोसी पंजाब ले गया था, जिसे पुलिस ने 20 से ज्यादा कैमरों की मदद से सुरक्षित परिवार तक पहुंचाया।
