Wednesday, April 1, 2026
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आदमपुर में BJP की रैली भी मुश्किल, बिश्नोई परिवार सत्ता में होकर भी हाशिए पर — 2024 की हार ने बदला समीकरण

पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल की पारंपरिक सीट मानी जाने वाली आदमपुर विधानसभा में अब बीजेपी के लिए रैली करना भी मुश्किल हो गया है। दिलचस्प बात यह है कि कुलदीप बिश्नोई सहित पूरा बिश्नोई परिवार भाजपा में शामिल है, फिर भी पार्टी को यहां मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं।

दरअसल, इसका कारण 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की आदमपुर से मिली हार है। भाजपा इस सीट को अपनी पक्की जीत मान रही थी, लेकिन भव्य बिश्नोई महज 1268 वोटों से हार गए।

हार का असर: सत्ता के करीब, कुर्सी से दूर

यह हार बिश्नोई परिवार की राजनीति के लिए बड़ा झटका साबित हुई।
मुख्यमंत्री नायब सैनी की भी नजर इस सीट पर थी, लेकिन हार के बाद बिश्नोई परिवार को राजनीतिक रूप से हाशिए पर कर दिया गया।
अब हालात यह हैं कि परिवार को मुख्यमंत्री की रैली में शामिल होने के लिए साथ लगते हलके नलवा तक जाना पड़ रहा है।

26 अक्टूबर को नलवा में रैली

मुख्यमंत्री नायब सैनी 26 अक्टूबर को हिसार जिले की नलवा विधानसभा में “जनता आभार रैली” करने जा रहे हैं।
यह रैली दिसंबर 2024 में होनी थी, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन के कारण टाल दी गई थी।
अब यह रैली कुलदीप बिश्नोई के करीबी विधायक रणधीर पनिहार के गांव पनिहार में आयोजित होगी।

लंबे समय बाद फिर सक्रिय हुआ बिश्नोई परिवार

2024 की हार के बाद बिश्नोई परिवार ने राजनीतिक गतिविधियां लगभग बंद कर दी थीं।
अब उन्होंने फिर से सक्रियता बढ़ाई है।
22 सितंबर को कुलदीप बिश्नोई के जन्मदिन पर भजनलाल की पुरानी आढ़त के सामने “जनहित दिवस” मनाया गया।
भजनलाल ने 2007 में “जनहित” शब्द से ही अपनी पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस (HJC) की स्थापना की थी।

8 सीटें मांगीं, मिलीं 3 — जीती सिर्फ 1

विधानसभा चुनाव से पहले कुलदीप बिश्नोई ने भाजपा नेतृत्व से 8 से 10 सीटों की मांग की थी।
भाजपा ने उन्हें 3 सीटें दीं — नलवा, आदमपुर और फतेहाबाद।

  • नलवा से कुलदीप के दोस्त रणधीर पनिहार ने जीत दर्ज की।
  • फतेहाबाद से चचेरे भाई दूड़ाराम और आदमपुर से भव्य बिश्नोई हार गए।

इससे बिश्नोई परिवार की राजनीतिक साख पर गहरा असर पड़ा।

लोकसभा टिकट न मिलने से नाराजगी

लोकसभा चुनाव में कुलदीप बिश्नोई हिसार सीट से टिकट चाहते थे,
लेकिन भाजपा ने उनकी जगह रणजीत चौटाला को उम्मीदवार बनाया — जो कांग्रेस के जयप्रकाश (JP) से हार गए।

इसके बाद कुलदीप ने कहा था —

“अगर भाजपा ने मुझे टिकट दिया होता, तो परिणाम कुछ और होते। हिसार में रणजीत चौटाला का कोई जनाधार नहीं था।”

रेणुका बिश्नोई ने संभाली रैली की कमान

अब नलवा रैली बिश्नोई परिवार के लिए साख का सवाल बन गई है।
रेणुका बिश्नोई ने खुद मोर्चा संभालते हुए गांव-गांव जाकर रैली के निमंत्रण शुरू कर दिए हैं।
वह जनता से कह रही हैं कि —

“कुलदीप बिश्नोई अब हर महीने हिसार में बैठक करेंगे और जनता से सीधे मिलेंगे।”

भव्य बिश्नोई भी नलवा हलके में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा —

“हम हिसार की जनता को आदमपुर या दिल्ली नहीं आने देंगे, बल्कि यहीं रहकर आपकी समस्याएं सुलझाएंगे।”

भजनलाल परिवार के समीकरण बिगड़ने के कारण

1️⃣ क्षेत्र से दूरी:
2022 के उपचुनाव में भव्य के जीतने के बाद भी कुलदीप बिश्नोई ने क्षेत्र से दूरी बनाए रखी।
लोगों में नाराजगी बढ़ी कि वह केवल चुनाव के वक्त ही आते हैं।

2️⃣ लगातार लोकसभा हार:
भजनलाल परिवार ने 57 साल तक आदमपुर सीट पर जीत दर्ज की थी,
लेकिन 2019 और 2024 में लगातार दो लोकसभा चुनावों में हार ने किला कमजोर कर दिया।

3️⃣ जातिगत समीकरण:
कांग्रेस ने 2024 में ओबीसी चेहरा चंद्र प्रकाश जांगड़ा को मैदान में उतारा।
उन्हें ओबीसी और जाट वोटर्स का समर्थन मिला, जिससे कांग्रेस को बढ़त मिली।

Sonu Baali
Sonu Baalihttp://khasharyananews.com
संस्थापक, खास हरियाणा न्यूज़- हरियाणा की ज़मीन से जुड़ा एक निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकार। पिछले 6+ वर्षों से जनता की आवाज़ को बिना किसी एजेंडे के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। देसी अंदाज़ और सच्ची पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। 🌐 khasharyana.com
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