हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर बिश्नोई समाज और आदमपुर विधानसभा क्षेत्र चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। आदमपुर के गांव सदलपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान महामंडलेश्वर आचार्य बजरंग दास जी महाराज भावुक हो गए। उन्होंने मंच से भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई को “युग पुरुष” बताते हुए समाज के लोगों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी।
कथा के दौरान कुलदीप बिश्नोई और नलवा से भाजपा विधायक रणधीर पनिहार मंच पर मौजूद रहे। संत के भावुक उद्बोधन ने पूरे पंडाल को स्तब्ध कर दिया। आचार्य बजरंग दास ने कहा कि जिस परिवार ने समाज को पहचान दिलाई, उसी को आज पहचानने में समाज चूक कर रहा है।
“धिक्कार है, जो कुलदीप को नहीं पहचान पाए”
महामंडलेश्वर ने बेहद कठोर शब्दों में कहा,
“धिक्कार है उस जीवन को, धिक्कार है उस कुल को और धिक्कार है उस बुद्धि को, जो कुलदीप बिश्नोई जैसे व्यक्ति को नहीं पहचान पा रही।”
उन्होंने कहा कि भगवान ने समाज को ऐसा महापुरुष घर में ही दिया, लेकिन लोग उसे अनदेखा कर रहे हैं।
संत ने हाथ जोड़कर समाज से अपील की कि कुलदीप बिश्नोई से सीखें, क्योंकि वे बिश्नोई समाज के लिए कुल रत्न हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि आदमपुर में हुई हार से उन्हें व्यक्तिगत रूप से गहरी पीड़ा हुई थी।
“मुझे किसी पार्टी से नहीं, भजनलाल परिवार से लगाव है”
आचार्य बजरंग दास ने स्पष्ट कहा कि उनका किसी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है।
“मुझे केवल भजनलाल परिवार से लगाव है। जब तक आपको इस परिवार से लगाव नहीं होगा, तब तक कुछ नहीं है,”
यह कहते हुए महाराज भावुक हो गए।

उन्होंने कहा कि इस परिवार को राजनीति की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि समाज को इस परिवार से सीखने की जरूरत है।
कुलदीप बिश्नोई को मिलेगा बड़ा पद!
कथा के दौरान संत ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि कुलदीप बिश्नोई को आने वाले समय में बड़ा पद और प्रतिष्ठा मिलेगी।
उन्होंने प्रतीकात्मक शब्दों में कहा,
“इस दीपक को घी डालकर जलाए रखो, नहीं तो कोई और इसे उठाकर ले जाएगा।”
उन्होंने विशेष रूप से सदलपुर गांव के लोगों को उलाहना देते हुए कहा कि गलती का सबसे बड़ा बोझ इसी गांव पर है।
भव्य बिश्नोई की हार पर भी संत का दर्द
महामंडलेश्वर ने बिना नाम लिए भव्य बिश्नोई का जिक्र किया और कहा,
“नन्हे से बालक ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था?”
उन्होंने कहा कि भजनलाल परिवार ने हमेशा समाज का हित किया है, नुकसान कभी नहीं।
सदलपुर क्यों बना हार की वजह?
सदलपुर आदमपुर का सबसे बड़ा और बिश्नोई बहुल गांव माना जाता है।
उपचुनाव में भव्य बिश्नोई को यहां 5500 वोटों की बढ़त मिली थी, लेकिन 2024 में यह बढ़त घटकर 3333 वोट रह गई।
यही गिरावट कुल मिलाकर हार की बड़ी वजह बनी।
57 साल बाद आदमपुर से हारने के बाद कुलदीप बिश्नोई भावुक हो गए थे और सार्वजनिक रूप से रो पड़े थे, जिसे आज भी लोग याद करते हैं।
पनिहार को पगड़ी पहनाने से जुड़ा विवाद
राजस्थान में विधायक रणधीर पनिहार को समाज की पगड़ी पहनाए जाने पर पहले विवाद खड़ा हो चुका था।
बिश्नोई संत लालदास महाराज ने पनिहार के स्वागत पर नाराजगी जताते हुए उन्हें समाज विरोधी तक कह दिया था।
हालांकि, आचार्य बजरंग दास ने कथा के दौरान पनिहार को पगड़ी पहनाकर यह संदेश देने की कोशिश की कि समाज में एकता जरूरी है।
राजनीति से ज्यादा समाज का संदेश
सदलपुर की कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि यह बिश्नोई समाज के भीतर चल रहे मंथन और राजनीति का आईना बन गई।
महामंडलेश्वर के शब्दों ने यह स्पष्ट कर दिया कि कुलदीप बिश्नोई आज भी समाज के एक बड़े चेहरे हैं, और उन्हें नज़रअंदाज़ करना भविष्य में भारी पड़ सकता है।
