हिसार जिले के गांव सुलखनी स्थित राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में स्कूल समय के दौरान स्टाफ द्वारा मोबाइल फोन के उपयोग की शिकायतें बढ़ने के बाद प्रिंसिपल राजकुमार श्योराण ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित स्टाफ को नोटिस जारी कर तीन दिनों में स्पष्टीकरण देने को कहा है। लगातार निर्देश देने के बावजूद कुछ स्टाफ सदस्यों द्वारा नियमों की अवहेलना किए जाने पर स्कूल प्रशासन ने यह कार्रवाई की है।
बार-बार निर्देश, फिर भी नहीं हुआ पालन
प्रिंसिपल राजकुमार श्योराण ने बताया कि पिछले छह महीनों में स्टाफ को कई बार लिखित निर्देश दिए गए कि स्कूल समय में किसी भी कर्मचारी को मोबाइल फोन का उपयोग करने की अनुमति नहीं है, ताकि बच्चों की पढ़ाई पर कोई असर न पड़े।
एसएमसी (स्कूल प्रबंधन समिति) की बैठक में भी इस मुद्दे पर स्पष्ट निर्णय लिया गया था कि मोबाइल फोन कक्षा की गतिविधियों को प्रभावित कर रहे हैं, इसलिए स्कूल समय के दौरान इन्हें जमा कराना अनिवार्य होगा।
इसके बावजूद, परिसर में संचालित प्राथमिक पाठशाला के कई शिक्षक इस आदेश का लगातार उल्लंघन करते रहे।
सितंबर माह में भी नई चेतावनी जारी की गई, परंतु इसके बाद भी मोबाइल फोन प्रयोग की शिकायतें बंद नहीं हुईं। हाल ही में जिला शिक्षा अधिकारी हिसार द्वारा भी सभी सरकारी स्कूलों को निर्देश दिए गए कि कक्षा के समय किसी भी कर्मचारी द्वारा मोबाइल का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। स्कूल प्रशासन ने यह निर्देश स्टाफ को अवगत भी कराए, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
बच्चों की सुरक्षा पर उठने लगे सवाल
प्रिंसिपल द्वारा जारी नोटिस में बताया गया कि कुछ स्टाफ सदस्य यह तर्क दे रहे हैं कि वे ठेकेदारी या निजी काम करते हैं, इसलिए मोबाइल का उपयोग आवश्यक है।
लेकिन प्रिंसिपल ने स्पष्ट कहा कि मोबाइल में व्यस्त रहने के चलते कई बार बच्चे कक्षा से बाहर चले जाते हैं और पास ही स्थित तालाब की ओर भटक जाते हैं, जिससे गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
उन्होंने इसे बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बताते हुए कहा कि ऐसी लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ नोटिस
प्रिंसिपल द्वारा जारी नोटिस की कॉपी गुरुवार को सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गई। इसमें स्टाफ की लापरवाही, मोबाइल पर निजी काम करने और बच्चों पर ध्यान न देने की बातें दर्ज थीं।
वायरल होने के बाद क्षेत्र में भी स्कूल स्टाफ की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। लोग पूछ रहे हैं कि जब शिक्षा विभाग स्पष्ट निर्देश जारी कर चुका है, तो स्टाफ द्वारा आदेशों की अनदेखी क्यों की जा रही है।
तीन दिन में जवाब, नहीं तो कार्रवाई
प्रिंसिपल राजकुमार श्योराण ने बताया कि प्राथमिक स्कूल के संबंधित स्टाफ को तीन दिनों का समय दिया गया है।
यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा—
“विद्यार्थियों की पढ़ाई और सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। किसी भी तरह की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
शिक्षा विभाग के सख्त निर्देश
स्कूल प्रशासन ने यह भी कहा कि भविष्य में आदेशों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।
सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम आवश्यक माना जा रहा है।
