नारनौंद नगर पालिका के खिलाफ सोमवार शाम कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा। नगर पालिका कर्मचारी संघ हरियाणा और सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा से जुड़े कर्मचारियों ने नगर पालिका परिसर से उपमंडल कार्यालय तक रोष मार्च निकाला और जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने हिसार कमिश्नर के नाम एक मांग पत्र नगर पालिका सचिव प्रदीप कुमार को सौंपा।
30 सफाई कर्मचारियों की अचानक छुट्टी से बढ़ा विवाद
जिला उपप्रधान नरेश कुमार ने बताया कि नगर पालिका ने शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से कौशल रोजगार योजना के तहत 30 सफाई कर्मचारियों को नियुक्त किया था। इन कर्मचारियों को भरोसा दिलाया गया था कि उन्हें नियमित कार्य मिलता रहेगा और उनकी सेवाएं लंबे समय तक नगरपालिका के साथ रहेंगी।
लेकिन कर्मचारियों के अनुसार, शहर को स्वच्छ रखने में दिन-रात मेहनत करने के बाद भी उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक हटा दिया गया।
नरेश कुमार के मुताबिक, “इन कर्मचारियों ने अपनी पूरी निष्ठा से शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाया था, लेकिन अचानक हटाए जाने से उनके परिवारों का जीवन संकट में आ गया है।”
नौकरी पर तुरंत बहाली की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि 30 कर्मचारियों को तुरंत बहाल किया जाए।
नरेश कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा—
“बिना आय के उनके घरों का चूल्हा बुझने की नौबत आ गई है। यदि हमारे साथ न्याय नहीं हुआ तो हमें बड़ा आंदोलन करना पड़ेगा।”
कर्मचारियों ने कहा कि सफाईकर्मियों को हटाना न केवल अनुचित है, बल्कि सरकार की रोजगार नीतियों का भी उल्लंघन है, जिसमें कौशल रोजगार योजना के तहत युवाओं को काम देने की बात कही गई है।
प्रशासन पर मनमानी का आरोप
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने नगर पालिका प्रशासन पर मनमानी और तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि सालों से सफाई व्यवस्था को संभाल रहे कर्मचारियों को अचानक हटाना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
कर्मचारियों का कहना है कि —

- निर्णय जल्दबाजी में लिया गया
- कर्मचारियों को अपने पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया
- उनका काम संतोषजनक होने के बावजूद उन्हें हटाना गलत है
कर्मचारियों ने प्रशासन को चेताया कि अगर उनकी बहाली नहीं हुई तो आंदोलन को जिला स्तर पर तेज किया जाएगा और संघर्ष को बढ़ाया जाएगा।
कई कर्मचारी आंदोलन में हुए शामिल
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे, जिनमें कृष्ण माजरा, भूपेंद्र, रोहित, मंजू, सोमपाल, प्रदीप, रवि, गोविंद, रोहतास, सुखबीर, संजय, शिव, गौरव, शिवचरण, अकबर, मोहित, सुनील, विनोद, आनंद, अमित, राहुल सहित कई कर्मचारी शामिल थे।
कर्मचारियों ने उम्मीद जताई कि नगर पालिका प्रशासन उनकी गंभीर समस्या को समझेगा और जल्द समाधान निकालेगा ताकि उनके परिवारों पर आई आर्थिक विपत्ति को टाला जा सके।
प्रशासन का क्या है रुख?
प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर अभी आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार सफाई व्यवस्था पुनर्गठन और बजट संबंधी मुद्दों के चलते यह कदम उठाया गया।
हालांकि कर्मचारी इसे राजनीतिक और प्रशासनिक मनमानी बता रहे हैं।
आगे क्या?
यदि मांगें पूरी नहीं होतीं, तो कर्मचारी संगठनों ने तेज आंदोलन और धरना की चेतावनी दी है। आने वाले दिनों में यह मामला नगर पालिका के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकता है।
