रोहतक: हरियाणा के लिए गौरव का पल तब आया, जब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत का शपथ ग्रहण समारोह रोहतक बार एसोसिएशन के आयोजनों के साथ यादगार बन गया। 75 साल के इतिहास में पहली बार हरियाणा का कोई व्यक्ति CJI के पद पर काबिज हुआ।
बार एसोसिएशन की तैयारी
रोहतक बार एसोसिएशन ने इस ऐतिहासिक अवसर के लिए चौधरी रणबीर सिंह हॉल को सजाया। समारोह के प्रारंभ में हवन किया गया और CJI सूर्यकांत के सुखद और सफल कार्यकाल की कामना की गई। इसके बाद बड़ी स्क्रीन का प्रबंध किया गया, जिस पर शपथ ग्रहण समारोह का लाइव प्रसारण दिखाया गया।
CJI सूर्यकांत का रोहतक से नाता
CJI सूर्यकांत ने अपनी एलएलबी की पढ़ाई महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक से 1984 में पूरी की थी। इसके बाद वह बार काउंसिल पंजाब और हरियाणा से एनरोल्ड हुए। हालांकि उन्होंने रोहतक में प्रैक्टिस नहीं की, लेकिन उनकी कर्मभूमि का शहर होने के कारण यह समारोह रोहतक में विशेष महत्व रखता है।
सर्वश्रेष्ठ करियर और उपलब्धियां
सूर्यकांत ने सबसे कम उम्र में हरियाणा के एडवोकेट जनरल बनने का गौरव हासिल किया। एलएलबी के बाद ही उन्होंने हिसार से प्रैक्टिस शुरू की और 1985 में चंडीगढ़ स्थानांतरित हो गए। 2018 में उन्होंने हिमाचल प्रदेश के चीफ जस्टिस के पद पर कार्य किया। अब हरियाणा से पहली बार किसी न्यायाधीश ने CJI का पदभार संभाला है।

पूर्व बार काउंसिल अध्यक्ष का दृष्टिकोण
बार काउंसिल पंजाब और हरियाणा के पूर्व अध्यक्ष विजेंद्र अहलावत ने कहा कि हरियाणा से CJI बनना न केवल सम्मान की बात है बल्कि प्रदेश के न्यायिक इतिहास में यह गर्व का पल है। उन्होंने बताया कि सूर्यकांत सरल स्वभाव के हैं और हमेशा समाजहित में फैसले करते हैं।
वकीलों के लिए योगदान
विजेंद्र अहलावत ने यह भी साझा किया कि रोहतक में मालखाना की जमीन को लेकर CJI सूर्यकांत ने वकीलों के हित में निर्णय लिया था। उस समय वह बिल्डिंग कमेटी के चेयरमैन थे और उन्होंने वकीलों के लिए वह जमीन उपलब्ध करवाई। उनके न्यायिक निर्णय हमेशा न्याय और मानवता पर आधारित रहे हैं।
समारोह का महत्व
शपथ ग्रहण समारोह को लाइव देखने के लिए बार एसोसिएशन के सदस्य, वरिष्ठ वकील और स्थानीय अधिकारी हॉल में मौजूद रहे। यह कार्यक्रम केवल शपथ ग्रहण का प्रतीक नहीं था बल्कि हरियाणा के न्यायिक इतिहास में एक ऐतिहासिक दिन साबित हुआ।
CJI सूर्यकांत का रोहतक और हरियाणा से गहरा नाता उनके न्यायिक करियर और व्यक्तिगत योगदान से झलकता है। बार एसोसिएशन ने इस अवसर को भव्य तरीके से मनाया और प्रदेश के लिए इस ऐतिहासिक क्षण को यादगार बना दिया।
हरियाणा के लिए यह गर्व का अवसर है कि अब राज्य से एक न्यायाधीश देश के सर्वोच्च न्यायालय का नेतृत्व कर रहा है। यह न केवल वकीलों और कानून पेशेवरों के लिए प्रेरणा है बल्कि युवाओं के लिए भी न्याय और सेवा के क्षेत्र में योगदान का आदर्श प्रस्तुत करता है।
