पानीपत रेलवे जंक्शन पर यात्रियों की सुविधा बढ़ाने और प्लास्टिक कचरे को कम करने के उद्देश्य से प्लेटफार्म नंबर-1 पर दो प्लास्टिक बोतल क्रेशर मशीनें लगाई गई थीं। रेलवे ने इन मशीनों पर लाखों रुपए खर्च किए थे, ताकि यात्री उपयोग की गई प्लास्टिक बोतलों को मशीन में डालकर वहीं नष्ट कर सकें और उन्हें रीसाइकिलिंग प्रक्रिया में भेजा जा सके। यह व्यवस्था स्टेशन को प्लास्टिक मुक्त बनाने और स्वच्छता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम माना गया था।
लेकिन रेलवे अधिकारियों की लापरवाही और मशीनों के रखरखाव की कमी के चलते दोनों क्रेशर मशीनें लंबे समय से बंद पड़ी हुई हैं। मशीनें बंद रहने का सीधा असर प्लेटफार्म की सफाई व्यवस्था पर दिख रहा है। यात्री पानी की बोतलें खरीदकर पानी पीने के बाद उन्हें प्लेटफार्म पर ही छोड़ देते हैं, जिससे पूरे प्लेटफार्म पर कचरे का ढेर लग जाता है। कई यात्री इन्हीं खाली बोतलों का दोबारा पानी भरने के लिए उपयोग करना शुरू कर देते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
यात्रियों का आरोप: रेलवे किराया तो लेता है, पर सुविधाएं नहीं देता
यात्री विनोद तिवारी, आकाश सिंह और दीपक चौहान ने बताया कि रेलवे ने मशीनें लगाने पर बड़ी राशि खर्च की थी। ऐसे में उनका सही रखरखाव और संचालन सुनिश्चित करना रेलवे की जिम्मेदारी है। लेकिन दोनों मशीनें महीनों से बंद पड़ी हैं और कभी तकनीकी खराबी, कभी इंजीनियर उपलब्ध न होने का बहाना बनाकर मामला टाल दिया जाता है।
यात्रियों का कहना है कि रेलवे स्वच्छता शुल्क भी लेता है, लेकिन प्लेटफार्म पर कचरे की स्थिति देखकर लगता है कि सफाई व्यवस्था केवल कागजों में ही चल रही है। प्लास्टिक बोतलों की बढ़ती संख्या से स्टेशन परिसर की सुंदरता भी प्रभावित हो रही है।
रेलवे अधिकारियों का दावा: जल्द ठीक होंगी मशीनें

रेलवे अधिकारियों के अनुसार प्लेटफार्म नंबर-1 पर लगी दोनों क्रेशिंग मशीनों में तकनीकी खराबी आई हुई है। संबंधित इंजीनियर को सूचना दे दी गई है और मशीनों को जल्द ठीक कराने की बात कही जा रही है। हालांकि प्लेटफार्म पर मौजूद वेंडरों का कहना है कि पिछले कई महीनों से यही आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन अब तक मशीनों को चालू नहीं किया गया है।
स्टेशन अधीक्षक रमेश चंद्र ने बताया कि वह विभागीय कार्य से बाहर गए हुए हैं। वापस लौटकर मशीनों को तुरंत सही कराकर पुनः चालू करवाया जाएगा। यात्रियों की बढ़ती शिकायतों के बीच यह सवाल बड़ा है कि रेलवे कब तक मशीनों को सुचारु रूप से चलाएगा।
मशीनें बंद, लेकिन ऊपर लगी एलईडी स्क्रीन लगातार चल रही
सबसे हैरानी की बात यह है कि मशीनें तो महीनों से बंद हैं, लेकिन उनके ऊपर लगी एलईडी स्क्रीन लगातार विज्ञापन दिखाती रहती है। इससे ऐसा लगता है कि रखरखाव केवल आधा-अधूरा किया गया है। मशीनें खराब होने से प्लास्टिक बोतलें प्लेटफार्म पर फेंकी जाती हैं और कचरा बढ़ते-बढ़ते गंभीर समस्या बन चुका है।
प्लास्टिक मुक्त स्टेशन की योजना को झटका
रेलवे द्वारा प्लास्टिक क्रेशिंग मशीन लगाने का उद्देश्य था—
- स्टेशन को प्लास्टिक मुक्त बनाना
- रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना
- यात्रियों को स्वच्छ वातावरण देना
लेकिन मशीनें बंद रहने से रेलवे की यह योजना धीमी पड़ गई है। यदि जल्द ही इन मशीनों को दोबारा चालू नहीं किया गया तो प्लेटफॉर्म पर कचरे की समस्या और बढ़ेगी।
