हिसार जिले के बास क्षेत्र के गांव खरबला में तीन साल से चल रहे सरपंच चुनाव विवाद पर आखिरकार बड़ा फैसला आ गया है। हिसार सेशन कोर्ट ने हांसी सिविल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें नवंबर 2022 के सरपंच चुनाव को अवैध मानते हुए पुनः चुनाव कराने के संकेत दिए गए थे। इस फैसले के बाद गांव में राजनीतिक माहौल फिर से गर्म हो उठा है, जबकि सरपंच पक्ष इसे जनादेश की जीत बता रहा है।
हांसी कोर्ट ने फर्जी वोटिंग के आधार पर चुनाव निरस्त किया था
यह मामला नवंबर 2022 में हुए सरपंच चुनाव से जुड़ा है। चुनाव में स्वाति देवी विजयी हुई थीं। लेकिन पराजित उम्मीदवार सुनीता देवी ने हांसी सिविल कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि–
- 3–4 मृतकों के नाम पर वोट डाले गए
- 25–30 वोट ऐसे लोगों के नाम से पड़े जो उस समय गांव में मौजूद ही नहीं थे
इन आरोपों को गंभीर मानते हुए हांसी कोर्ट ने चुनाव को अमान्य घोषित कर दिया था। इस निर्णय ने गांव में काफी तनाव और अनिश्चितता पैदा कर दी थी और प्रशासन भी असमंजस में था।
सेशन कोर्ट ने फैसला पलटा — याचिका समय सीमा से बाहर
मामले की दोबारा समीक्षा करते हुए हिसार सेशन कोर्ट की जज मधुलिका ने हांसी कोर्ट के फैसले को गलत ठहराया।
कोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:
- याचिका समय सीमा से बाहर दाखिल की गई थी।
चुनाव 25 नवंबर 2022 को हुए थे, लेकिन याचिका जनवरी 2023 में दाखिल हुई, जबकि कानून में चुनाव याचिका दाखिल करने की निश्चित समय-सीमा निर्धारित है। - फर्जी वोटिंग के आरोप निर्णायक रूप से साबित नहीं हुए।
कोर्ट ने कहा कि मृतकों के वोट पड़ने की आशंका हो सकती है, लेकिन यह सिद्ध नहीं हुआ कि ये वोट किस उम्मीदवार के पक्ष में गए। - जीत का अंतर बड़ा था, इसलिए कुछ विवादित वोट परिणाम बदलने में सक्षम नहीं थे।
इस आधार पर हांसी कोर्ट का आदेश न्यायसंगत नहीं पाया गया।

“सत्य की जीत” — हरिओम, सरपंच प्रतिनिधि
सेशन कोर्ट के निर्णय के बाद सरपंच पक्ष में खुशी की लहर है। सरपंच प्रतिनिधि हरिओम ने कहा—
“यह गांव के जनादेश और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जीत है। सेशन कोर्ट ने तथ्यों और कानून के आधार पर फैसला सुनाया। हांसी कोर्ट ने अपूर्ण व एकतरफा तथ्यों पर निर्णय दिया था, जिसे अब न्याय मिला है।”
उन्होंने उम्मीद जताई कि अब गांव का विकास बिना किसी कानूनी रुकावट के आगे बढ़ सकेगा।
गांव में हलचल, विरोधी पक्ष रणनीति पर विचार में
फैसले के बाद गांव खरबला में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
- समर्थक इसे विवाद के अंत और स्थिर प्रशासन की शुरुआत मान रहे हैं।
- विरोधी गुट अभी भी आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार कर रहा है।
फिर भी सेशन कोर्ट की यह टिप्पणी कि याचिका समय सीमा से बाहर थी और आरोप निर्णायक रूप से साबित नहीं थे, पूरे मामले में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बनी है।
तीन साल पुराना विवाद खत्म होने की उम्मीद
करीब तीन साल से चले आ रहे इस पंचायत चुनाव विवाद ने गांव की राजनीति, विकास कार्यों और सामाजिक वातावरण को प्रभावित किया था। अब सेशन कोर्ट के फैसले से ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि प्रशासनिक स्थिरता लौटेगी और पंचायत सामान्य रूप से कार्य कर पाएगी।
