देश को 24 नवंबर को एक नया चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया मिलने जा रहा है। जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें CJI के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे। मौजूदा CJI भूषण आर. गवई का कार्यकाल 23 नवंबर को समाप्त हो रहा है। शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन में आयोजित होगा, जिसके लिए निमंत्रण पत्र तैयार कर दिए गए हैं। इस ऐतिहासिक मौके पर जस्टिस सूर्यकांत का पूरा परिवार, रिश्तेदार और हिसार बार एसोसिएशन के 136 वकील शामिल होंगे।
हिसार के पेटवाड़ गांव का गर्व
जस्टिस सूर्यकांत का परिवार हरियाणा के हिसार जिले के पेटवाड़ गांव से ताल्लुक रखता है। उनके बड़े भाई मास्टर ऋषिकांत गांव में परिवार के साथ रहते हैं, जबकि छोटे भाई शिवकांत हिसार शहर में और देवकांत दिल्ली में रहते हैं। तीनों भाइयों को भी कार्यक्रम में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।
परिवार 23 नवंबर को दिल्ली रवाना होगा और हरियाणा भवन में ठहरेगा। रवाना होने से पहले जींद के ब्रह्म महाविद्यालय में हवन-यज्ञ किया जाएगा।
136 वकीलों को मिला विशेष पास
हिसार बार एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट संदीप बूरा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासन द्वारा 136 वकीलों को विशेष पास जारी किए गए हैं। जिला बार एसोसिएशन ने शुक्रवार को इन पासों को संबंधित सदस्यों को वितरित किया।
जो सदस्य दिल्ली नहीं जा सकेंगे, उनके लिए हिसार बार परिसर में बड़ी LED स्क्रीन पर शपथ ग्रहण का लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा। साथ ही बार परिसर में सजावट, हवन, ब्लड डोनेशन कैंप और लड्डू वितरण की तैयारियां की जा रही हैं।

हिसार से शुरू हुआ सफर
साल 1984-85 में जस्टिस सूर्यकांत ने हिसार जिला न्यायालय में एक वकील के रूप में अपना करियर शुरू किया था। उन्होंने स्वर्गीय आत्माराम बंसल के यहां जूनियर के रूप में कार्य किया। आज वही युवा वकील देश की सर्वोच्च न्यायिक कुर्सी पर पहुंच रहा है, जिसे लेकर हिसार बार के लिए यह क्षण ऐतिहासिक बन गया है।
परिवार की खास बातें
जस्टिस सूर्यकांत के भाई ऋषिकांत बताते हैं कि परिवार के सभी सदस्य शिक्षक रहे, लेकिन सूर्यकांत ने सबसे अलग रास्ता चुना और कानून की पढ़ाई की।
- 10वीं गांव के सरकारी स्कूल से
- कॉलेज की पढ़ाई हिसार के सरकारी कॉलेज से
- गांव के स्कूल में जमीन पर बैठकर पढ़ाई
- शुरू से ही हाजिर जवाब और तेज बोलने वाले
कॉलेज समय में उन्होंने “मेढ़ पर मिट्टी चढ़ा दो” नामक लोकप्रिय कविता भी लिखी थी।
परिवार का साहित्यिक इतिहास
उनके पिता मदन गोपाल संस्कृत के शिक्षक, लेखक और साहित्यकार थे।
उन्होंने हरियाणवी में रामायण लिखी, जिसके लिए उन्हें सूरदास पुरस्कार मिला। उनकी 14 पुस्तकें प्रकाशित हुईं, जिनमें नगरी नगरी द्वारे द्वारे, माटी की महक और रागनी संग्रह चूंदड़ी प्रमुख हैं।
पिता जातिवाद में विश्वास नहीं करते थे और संयुक्त परिवार की परंपरा को हमेशा आगे बढ़ाया।
गांव के बच्चों के लिए प्रेरणा
जस्टिस सूर्यकांत हर वर्ष गांव के 10वीं और 12वीं के टॉपर छात्रों को सम्मानित करते हैं। परिवार का “पंडित राम प्रसाद आत्माराम धर्मार्थ न्यास” बिना किसी चंदे के चलाया जाता है। CJI बनने के बाद भी वे इस कार्यक्रम में शामिल होने का वादा कर चुके हैं।
परिवार और समाज का गर्व
जस्टिस सूर्यकांत की दो बेटियां हैं — मुग्धा और कनुप्रिया। उनकी पत्नी सविता सूर्यकांत इंग्लिश प्रोफेसर और रिटायर्ड कॉलेज प्रिंसिपल हैं।
हिसार के लिए यह गर्व का क्षण है कि जिला न्यायालय से कॅरियर शुरू करने वाला एक साधारण परिवार का बेटा आज देश का मुख्य न्यायाधीश बनने जा रहा है।
