जींद जिले के जुलाना क्षेत्र के शामलो कलां गांव में जल्द ही बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल स्किल्स की कोचिंग मिलने जा रही है। इसके लिए गांव की लाइब्रेरी में अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। यह पहल समाईरा पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा की जा रही है, जिसने शामलो कलां को गोद लेकर इसे आदर्श गांव बनाने का लक्ष्य रखा है।

संस्था के डायरेक्टर मेजर मनदीप सिंह ने बताया कि ग्रामीण छात्रों को आधुनिक शिक्षा और डिजिटल स्किल्स सीखने का अवसर मिलेगा। कंप्यूटर लैब तैयार होने के बाद बच्चों को एआई, बेसिक कंप्यूटिंग, डिजिटल लर्निंग और अन्य आधुनिक शिक्षा पद्धतियों के तहत प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा, छात्रों को एसएसबी (सेवा चयन बोर्ड) की तैयारी की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
मेजर मनदीप सिंह ने कहा कि ग्रामीण छात्रों को आगे बढ़ने के लिए तकनीकी कौशल बेहद जरूरी है। इस पहल से गांव के बच्चों को शहरों जैसी शिक्षा सुविधाएं मिलेंगी, जिससे वे भविष्य की जरूरतों के अनुसार खुद को तैयार कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य बच्चों को तकनीकी दृष्टि से सशक्त बनाना और उन्हें डिजिटल दुनिया से जोड़ना है।
संस्था अध्यक्ष विशाल पॉल ने युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करें और अपने गांव व माता-पिता का नाम रोशन करें। उन्होंने कहा कि शामलो कलां के बच्चों को आधुनिक शिक्षा देकर आत्मनिर्भर बनाना संस्था का प्राथमिक लक्ष्य है। विशाल पॉल ने कहा कि यह पहल गांव में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं को रोजगार और नई तकनीकों के लिए तैयार करेगी।
इस अवसर पर गांव के सरपंच विरेंद्र सिंह, पंच दीपक, पंच संदीप और पंच राजेश सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत किया और कहा कि इससे गांव के बच्चों को नई दिशा मिलेगी और उनकी प्रतिभा को निखारने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि इस तरह की और परियोजनाएं गांव में शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने में सहायक होंगी।
समाईरा पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने इस परियोजना के तहत यह भी योजना बनाई है कि छात्रों को नियमित रूप से कंप्यूटर और एआई से संबंधित प्रतियोगिताओं और कार्यशालाओं में भाग लेने का अवसर मिले। यह कदम बच्चों में नवाचार और समस्या सुलझाने की क्षमता को बढ़ावा देगा।
कुल मिलाकर, यह पहल ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे शामलो कलां गांव के बच्चों को न केवल तकनीकी शिक्षा मिलेगी बल्कि वे डिजिटल दुनिया में आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। इस परियोजना की सफलता अन्य गांवों के लिए भी एक उदाहरण साबित हो सकती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और कौशल विकास की दिशा में और परियोजनाओं को प्रेरणा मिलेगी।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल बच्चों को डिजिटल और तकनीकी स्किल्स से लैस करना है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वासी और सशक्त नागरिक बनाना भी है। ग्रामीण युवा अब अपने गांव से जुड़े रहकर भी आधुनिक शिक्षा और कौशल प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उनके भविष्य के अवसर बेहतर होंगे।
