हरियाणा पुलिस थानों में सालों से खड़े जब्त वाहन अब रिलीज होंगे: हाईकोर्ट ने दिया बड़ा आदेश
हरियाणा और पंजाब के पुलिस थानों में वर्षों से खड़े जब्त वाहनों की रिहाई का रास्ता अब साफ हो गया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि वाहनों को लंबे समय तक पुलिस के पास खड़ा रखने से कोई लाभ नहीं होता, इसलिए इनके डिजिटल साक्ष्य तैयार करके इन्हें रिलीज किया जाना चाहिए।
यह आदेश गुरुग्राम के एक मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया, जहाँ एक न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मारपीट के केस में इस्तेमाल कार को छोड़े जाने से इंकार कर दिया था।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
✔️ वाहनों के हाई क्वालिटी वीडियो और तस्वीरें रिकॉर्ड की जाएं
- सभी कोणों से फोटो
- चेसिस और इंजन नंबरों के क्लोज-अप
- हाई क्वालिटी वीडियो, जिसमें बोनट और केबिन खोलकर रिकॉर्डिंग शामिल हो
इन डिजिटल साक्ष्यों को गवाहों और पीड़ितों को पहचान के लिए दिखाया जा सकता है और इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
तकनीक के इस्तेमाल पर जोर
बेंच ने कहा कि तकनीक के जरिए डिजिटल साक्ष्य को अनिश्चित काल तक सुरक्षित रखा जा सकता है, इसलिए वाहन को वर्षों तक थानों में खड़े रखने का कोई औचित्य नहीं बनता।

सभी न्यायिक अधिकारियों को भेजा जाएगा आदेश
हाईकोर्ट ने यह आदेश पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के सभी न्यायिक अधिकारियों को भेजने को कहा है।
किन वाहनों पर लागू होगा फैसला?
- सिर्फ वही वाहन, जिनकी जब्ती किसी कानून या कोर्ट आदेश के तहत अनिवार्य नहीं है।
- यह आदेश सामान्य वाहनों की रिहाई पर लागू होगा।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
- रिहाई के आवेदनों को केवल कारण बताकर खारिज नहीं किया जा सकता।
- सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाए।
- जहां रिहाई संभव हो, इस आदेश का संदर्भ लेकर वाहन छोड़ा जा सकता है।
इस मामले में सुनाया गया हाईकोर्ट का फैसला
गुरुग्राम के एक केस में मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा कार को न छोड़ने के आदेश को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया और कहा कि —
✔️ वाहन 60 दिनों के भीतर रिलीज किया जाए
लेकिन इसके लिए कुछ विशेष शर्तें पूरी करनी होंगी।
वाहन रिलीज की शर्तें (High Court Conditions)
1. फोरेंसिक और मैकेनिकल जांच
यदि आवश्यक हो, जांच एजेंसी वाहन की फोरेंसिक और यांत्रिक जांच करेगी।
2. हाई क्वालिटी फोटो और वीडियो
- सभी दिशाओं से
- चेसिस और इंजन नंबर
- बोनट/केबिन ओपन स्थिति
यह रिकॉर्डिंग एक सीलबंद डिजिटल डिवाइस में संग्रहीत की जाएगी और जांच एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की जा सकती है।
3. स्वामित्व साबित करने के लिए हलफनामा
याचिकाकर्ता को एक हलफनामा देना होगा कि वह वाहन का वास्तविक मालिक है।
4. RC की प्रमाणित प्रति कोर्ट में जमा
मूल RC की प्रमाणित कॉपी कोर्ट रिकॉर्ड में रखी जाए और मूल दस्तावेज दावेदार को वापस कर दिया जाए।
