हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के ₹72 करोड़ के घोटाले में पंचकूला और सोनीपत के दो आरोपियों को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नीरू कंबोज की अदालत ने मुख्य आरोपी सुनील कुमार बंसल (64 वर्ष, निवासी सेक्टर 17 पंचकूला) और सह-आरोपी नवीन कुमार (32 वर्ष, निवासी सोनीपत) की जमानत याचिकाएँ खारिज कर दीं।
अदालत ने कहा: सार्वजनिक धन से जुड़े अपराध में जमानत नहीं
कोर्ट ने आदेश में कहा कि “आरोपों की प्रकृति, गंभीरता और करोड़ों रुपए के सार्वजनिक धन से जुड़े इस आर्थिक अपराध में आवेदकों की कथित संलिप्तता को देखते हुए, जमानत देने का कोई मामला नहीं बनता।”
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला मार्च 2023 में तब सामने आया जब एचएसवीपी अधिकारियों ने डीसीपी पंचकूला को शिकायत दी कि किसी ने विभाग के नाम से एक फर्जी बैंक खाता खोलकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की है। इसके बाद सेक्टर 7 थाना पंचकूला में IPC की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया, जिसमें धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC एक्ट) की धाराएं शामिल हैं।

जांच में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे
1️⃣ फर्जी बैंक खाता:
पता चला कि 30 मई 2015 को पंजाब नेशनल बैंक, मनीमाजरा में “लेखा अधिकारी, हुडा (मुख्यालय), पंचकूला” के नाम से एक फर्जी खाता खोला गया था। यह खाता बंसल के मोबाइल नंबर से जुड़ा हुआ था, जो उस समय एचएसवीपी में वरिष्ठ लेखा अधिकारी थे।
2️⃣ ₹72 करोड़ का गबन:
यह खाता 27 फरवरी 2019 को, बंसल की सेवानिवृत्ति से ठीक पहले बंद किया गया। इस खाते से ₹72 करोड़ के अनधिकृत लेनदेन किए गए, जिनका विभागीय रिकॉर्ड में कोई जिक्र नहीं है।
3️⃣ एसआईटी जांच में खुलासा:
एसआईटी ने जांच में पाया कि बंसल ने अन्य अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर गबन किया। उनके कार्यकाल (2005–2019) में लगभग ₹68.85 करोड़ की हेराफेरी हुई। यह रकम दो एचएसवीपी खातों से 85 अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई।
4️⃣ ईडी की गिरफ्तारी:
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 9 जून को बंसल को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया। इसके बाद जुलाई 2025 में कई और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें विजय कुमार, मनोज पाल, यश बिंदल, नवीन कुमार, भरत, नरेश कुमार, हरीश कुमार, सुरेंद्र कुमार, रामकेश सिंह और हरकेश शर्मा शामिल हैं।
कोर्ट का सख्त रुख
कोर्ट ने कहा कि यह मामला “सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और विश्वासघात” से जुड़ा है, जो समाज के लिए गंभीर अपराध है। इसलिए दोनों आरोपियों को जमानत देने से इनकार किया गया।
