पानीपत जिले के इसराना उपमंडल के बुआना लाखु गांव निवासी रोहित मलिक ने एक बार फिर हरियाणा और भारत का नाम रोशन किया है। कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में आयोजित पैरा जूडो चैंपियनशिप में रोहित ने कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
यह प्रतियोगिता 3 से 10 नवंबर तक चली, जिसमें रोहित ने अपने 78 से 80 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए यह उपलब्धि हासिल की। वे इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाले भारतीय पैरा दल के 12 सदस्यों में से एक थे।
पहले भी जीत चुके हैं अंतरराष्ट्रीय पदक:
यह पहली बार नहीं है जब रोहित मलिक ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीता हो। इससे पहले, 2019 में इंग्लैंड में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स पैरा जूडो चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया था।

गरीब परिवार से निकलकर बनाया इतिहास:
रोहित मलिक का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें खेलों का शौक था। एक हादसे में उन्होंने अपनी आंखों की रोशनी खो दी, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
उन्होंने पैरा जूडो को अपनी ज़िंदगी का लक्ष्य बनाया और 2015 से 2025 तक लगातार कड़ी मेहनत और समर्पण के बल पर इस मुकाम तक पहुंचे।
गांव में खुशी की लहर:
उनकी इस उपलब्धि से बुआना लाखु गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।
दादा लाखु स्पोर्ट्स एंड सोशल संगठन के प्रधान प्रदीप मलिक और गांव के सरपंच मोहित मलिक ने रोहित को बधाई दी और कहा कि वे पूरे हरियाणा के लिए प्रेरणा हैं।
