हरियाणा के पानीपत जिले में एक रिटायर्ड थर्मल कर्मचारी सुभाष चंद्र को साइबर अपराधियों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठग लिया। ठगों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच और CBI अधिकारी बताकर 17 दिनों तक उन्हें वर्चुअल हिरासत में रखा और इस दौरान उनके बैंक खातों से ₹42 लाख 70 हजार रुपए उड़ा लिए।
पीड़ित ने अब साइबर थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ शिकायत दी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सुभाष ने बताया कि यह रकम उनकी जीवनभर की जमा पूंजी थी।
इस तरह फंसे ठगों के जाल में:

- मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर कॉल:
सुभाष चंद्र के मोबाइल पर कॉल आई। कॉलर ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया और कहा कि उन्होंने एक व्यक्ति को पकड़ा है, जिसने 5 लाख में सुभाष का बैंक खाता खरीदा और उसमें 2 करोड़ रुपए का लेन-देन किया है। - खाते की जानकारी देकर बढ़ा खतरा:
ठगों की बातों में आकर सुभाष ने डर के मारे अपने बैंक खातों की जानकारी साझा कर दी। - फर्जी पुलिस स्टेशन और CBI डॉक्यूमेंट दिखाए:
इसके बाद उन्हें वीडियो कॉल पर फर्जी पुलिस ऑफिस और CBI पहचान पत्र दिखाए गए। आरोपियों ने धमकी दी कि उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। - केस से बाहर निकालने का झांसा:
ठगों ने कहा कि उनकी जांच चल रही है और बैंक खातों की राशि अस्थायी रूप से ट्रांसफर करनी होगी। इसी झांसे में आकर सुभाष ने PNB और पोस्ट ऑफिस बैंक से कई किस्तों में ₹42.70 लाख भेज दिए। - 17 दिन तक रखा डिजिटल अरेस्ट में:
17 अक्टूबर से 2 नवंबर तक सुभाष को किसी से संपर्क नहीं करने दिया गया। ठगों ने उन्हें कॉल और सोशल मीडिया पर भी बात करने से मना कर दिया।
पुलिस की कार्रवाई:
साइबर थाना प्रभारी अजय ने बताया कि शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस टीम उन बैंक खातों को होल्ड करने की प्रक्रिया में है, जिनमें राशि ट्रांसफर हुई थी। उन्होंने कहा कि जांच तेज़ी से जारी है और जल्द ही आरोपियों तक पहुंच बनाई जाएगी।
