हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मानेसर लैंड स्कैम मामले में शुक्रवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान उनकी याचिका को खारिज कर दिया, जिससे अब पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में उनके खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
सीबीआई पहले ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब विशेष अदालत ही हुड्डा और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करेगी, जिसके बाद ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे सीबीआई जांच के आदेश
गौरतलब है कि मानेसर लैंड स्कैम की जांच का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया था। अदालत ने पाया था कि वर्ष 2007 में हुड्डा सरकार द्वारा अधिग्रहण प्रक्रिया को रद्द करने का निर्णय दुर्भावनापूर्ण और धोखाधड़ीपूर्ण था। अदालत ने सीबीआई को जांच करने और बिचौलियों द्वारा अर्जित अनुचित लाभ की राशि राज्य सरकार से वसूलने के निर्देश दिए थे।
हुड्डा ने क्या लगाई थी याचिका
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पंचकूला विशेष सीबीआई अदालत के 19 सितंबर के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। विशेष अदालत ने उनकी याचिका खारिज करते हुए अगली सुनवाई में आरोप तय करने का निर्देश दिया था। हुड्डा के वकीलों ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ सह-आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगाई है, इसलिए अन्य के खिलाफ आरोप तय करना अवैध और असंगत है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि मामले में आगे की कार्यवाही जारी रहेगी।

सीबीआई ने दाखिल की थी 80 हजार पन्नों की चार्जशीट
सीबीआई ने सितंबर 2015 में जांच शुरू की थी और 2018 में हुड्डा समेत 34 लोगों के खिलाफ 80,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि सरकारी अधिग्रहण के नाम पर गुरुग्राम के मानेसर और आसपास के गांवों के किसानों से सस्ते दामों पर सैकड़ों एकड़ जमीन ली गई, जिसे बाद में रियल एस्टेट कंपनियों और कॉलोनाइजरों को रियायती दरों पर लाइसेंस देकर सौंप दिया गया।
ईडी ने की 66.57 करोड़ की संपत्ति अटैच
इस साल जनवरी में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए 18.5 एकड़ जमीन सहित 66.57 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की थी। यह संपत्तियाँ महामाय एक्सपोर्ट और अन्य आरोपियों से जुड़ी बताई गईं।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मामला अब पूरी तरह से सीबीआई विशेष अदालत के दायरे में आ गया है। आने वाले दिनों में आरोप तय होने के बाद इस बहुचर्चित लैंड स्कैम केस की सुनवाई और तेज होने की संभावना है।
