पानीपत ने हरियाणा ओलंपिक खेलों में 1 किलोमीटर कैनोइंग में सिल्वर मेडल जीता
हरियाणा ओलंपिक खेलों की नौकायन प्रतियोगिता में पानीपत की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया है। यह प्रतियोगिता चंडीगढ़ में आयोजित हुई, जिसमें 1 किलोमीटर, 500 मीटर और 200 मीटर की विभिन्न स्पर्धाओं का आयोजन किया गया।
पानीपत की टीम में गांव नौल्था के मुकुल और रिंकू शामिल थे, जिन्होंने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई। उनकी मेहनत और समर्पण ने जिले और राज्य का नाम रोशन किया है।
हरियाणा ओलंपिक खेलों का आगाज
हरियाणा ओलंपिक खेलों का आगाज 5 नवंबर को गुरुग्राम के चौधरी देवी लाल स्टेडियम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा किया गया। नौकायन प्रतियोगिताएं 6 नवंबर से चंडीगढ़ में शुरू हुईं, जिसमें राज्यभर के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
कोच का बयान:
खिलाड़ियों के कोच विजेंद्र सिंह ने बताया कि मुकुल और रिंकू दोनों ही बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। उन्होंने जनवरी 2025 में दिल्ली में आयोजित सीनियर नेशनल लेवल नौकायन प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता था। इसके अलावा, रिंकू ने जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी हासिल किया।
मुकुल और रिंकू पिछले तीन साल से सोनीपत जिले के आहुलाना गांव में लगातार अभ्यास कर रहे हैं। दोनों ही खिलाड़ी नौल्था स्थित गीता यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं और गरीब परिवारों से आते हैं। उनकी यह उपलब्धि उनके परिवार और गांव के लिए गर्व का विषय है।

परिवार और जिले का गर्व
खिलाड़ियों के पिता ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि बेटों ने उनकी उम्मीदों से बढ़कर प्रदर्शन किया है। इस सफलता से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन हुआ है।
हरियाणा ओलंपिक खेलों में पानीपत की यह उपलब्धि राज्य के खेलों के क्षेत्र में प्रेरणा स्रोत बन गई है। मुकुल और रिंकू जैसी युवा प्रतिभाएं न केवल जिला बल्कि पूरे राज्य के लिए नई ऊँचाइयों तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं।
भविष्य की संभावनाएं
पानीपत की यह टीम अब अगले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कैनोइंग और नौकायन प्रतियोगिताओं के लिए भी तैयारी कर रही है। उनकी मेहनत और समर्पण आने वाले वर्षों में और भी बड़े पुरस्कार और मेडल जीतने में मदद करेगा।
यह सफलता युवा खिलाड़ियों और पूरे राज्य को खेलों के प्रति प्रेरित करती है और यह संदेश देती है कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से गरीब और छोटे गाँवों के खिलाड़ी भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमक सकते हैं।
