हिसार के चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में हरियाणा ओलिंपिक संघ द्वारा आयोजित 27वीं हरियाणा राज्य कुश्ती प्रतियोगिता का समापन गुरुवार को हुआ। समापन समारोह में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर जिला प्रधान आशा खेदड़ और हरियाणा ओलिंपिक संघ के उपाध्यक्ष एवं प्रशिक्षक राकेश भी मौजूद रहे।
मुख्य अतिथि श्याम सिंह राणा ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि हरियाणा सरकार खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में खेल स्टेडियम और नर्सरियों की स्थापना की जा रही है ताकि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि खेल अनुशासन, आत्मविश्वास और भाईचारे की भावना को मजबूत करते हैं।
मंत्री राणा ने बताया कि हरियाणा के पहलवानों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर राज्य और देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि हर गांव से एक खिलाड़ी निकले जो हरियाणा का झंडा ऊंचा करे।
प्रतियोगिता निदेशक संजय मलिक ने जानकारी दी कि इस प्रतियोगिता में राज्यभर के सैकड़ों पहलवानों ने हिस्सा लिया और दमदार प्रदर्शन किया।
फ्री स्टाइल महिला वर्ग में —
- 57 किलोग्राम भार वर्ग में चरखी दादरी की रजनी ने स्वर्ण, यमुनानगर की बबली ने रजत और रोहतक की मोनिका ठाकुर ने कांस्य पदक जीता।
- 62 किलोग्राम वर्ग में रोहतक की काजल ने स्वर्ण, भिवानी की अंकिता ने रजत, जबकि फरीदाबाद की प्राची और पानीपत की खुशी ने कांस्य पदक जीता।
- 72 किलोग्राम वर्ग में हिसार की तनु शर्मा ने स्वर्ण पदक हासिल किया, भिवानी की कविता ने रजत, जबकि सोनीपत की आरजू और रोहतक की रिया कौशिक ने कांस्य पदक जीता।

ग्रीको रोमन पुरुष वर्ग में —
- 67 किलोग्राम में रोहतक के मेघनाथ ने स्वर्ण पदक, हिसार के सतपाल ने रजत और चरखी दादरी के सुमित व पानीपत के संदीप ने कांस्य पदक जीता।
- 77 किलोग्राम वर्ग में रोहतक के विकास राणा ने स्वर्ण, सिरसा के विनय गुर्जर ने रजत, जबकि जींद के धीरज और कैथल के राहुल ने कांस्य पदक जीता।
- 82 किलोग्राम वर्ग में भिवानी के विकास ने स्वर्ण पदक, यमुनानगर के आयुष ने रजत और झज्जर के तुषार व चरखी दादरी के सुशील ने कांस्य पदक जीतकर अपने-अपने जिलों का मान बढ़ाया।
यह प्रतियोगिता हरियाणा में कुश्ती के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों के समर्पण का प्रतीक रही। खिलाड़ियों के उत्साह और जज्बे ने यह साबित कर दिया कि हरियाणा आज भी भारत की कुश्ती राजधानी बना हुआ है।
