हरियाणा के पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह के कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद पार्टी में राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। हिसार में वरिष्ठ कांग्रेस नेता अनिल मान ने संपत सिंह के आरोपों का खुलकर जवाब दिया। अनिल मान ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि संपत सिंह ने जब इनेलो छोड़ी थी, उस समय कांग्रेस को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी।
अनिल मान खुद नलवा विधानसभा से संपत सिंह का टिकट कटवाने के बाद उम्मीदवार बने थे, लेकिन चुनाव हार गए थे। उन्होंने कहा कि संपत सिंह ने ओमप्रकाश चौटाला और अभय चौटाला पर आरोप लगाए, इसके बाद भाजपा और फिर इनेलो के संपर्क में आए।
अनिल मान ने साफ किया कि जब संपत सिंह कांग्रेस में आए, तो उन्होंने फतेहाबाद से चुनाव लड़ने का अनुरोध किया। सर्वे में उनकी हार का आंकड़ा सामने था। तब भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने नेतृत्व में उन्हें नलवा विधानसभा से टिकट दिया। नलवा में विरोध के बावजूद, हुड्डा के प्रयास से संपत सिंह विजयी हुए।

मंत्री पद ना मिलने के सवाल पर अनिल मान ने कहा कि किसी भी पार्टी का नेता जब दूसरी पार्टी में जाता है, तो उसे सीनियॉरिटी नहीं मिलती और उसे नए सिरे से शुरुआत करनी पड़ती है। उस समय कांग्रेस मंत्रिमंडल में पहले से ही कई काबिल लोग थे, जिन्हें शामिल किया गया था। संपत सिंह से कभी भी कोई वादा नहीं किया गया था कि वह चुनाव जीतकर मंत्री बनेंगे।
अनिल मान ने यह भी जोर देकर कहा कि संपत सिंह का कांग्रेस में योगदान महत्वपूर्ण था, लेकिन उनकी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और पार्टी नीति के चलते उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि पार्टी का निर्णय पारदर्शिता और योग्यता पर आधारित था।
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस में संपत सिंह के इस्तीफे और पार्टी नेतृत्व के बीच चल रहे विवाद पर चर्चा बढ़ गई है। पार्टी के भीतर कई नेताओं की साख और चुनाव रणनीति पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इस पूरे मामले ने हरियाणा की राजनीति में कांग्रेस के अंदरूनी गतिशीलता को उजागर किया है और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की स्थिति पर असर डाल सकता है।
