हरियाणा के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजे पत्र में पार्टी नेतृत्व पर भरोसा खत्म होने की बात कही। चर्चा है कि वे इनेलो में शामिल हो सकते हैं।
हरियाणा की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए राज्य के पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। 48 साल पहले ताऊ देवीलाल का हाथ थामकर राजनीति में कदम रखने वाले संपत सिंह ने रविवार (2 नवंबर) को अपना त्यागपत्र कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा। इस्तीफे की प्रति राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, बीके हरिप्रसाद और राव नरेंद्र सिंह को भी भेजी गई है।
संपत सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि अब उन्हें कांग्रेस की उस क्षमता पर भरोसा नहीं रहा जो हरियाणा की जनता के हितों का प्रतिनिधित्व कर सके। उन्होंने कहा — “मैं एक गर्वित हरियाणवी हूं और अपने प्रदेश की जनता को निराश नहीं कर सकता। वर्तमान कांग्रेस नेतृत्व में मेरा विश्वास समाप्त हो गया है।
दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने अपने इस्तीफे में एक बार भी भूपेंद्र सिंह हुड्डा का नाम नहीं लिया, जबकि वह लंबे समय से हुड्डा के करीबी माने जाते थे। वहीं, उन्होंने सांसद कुमारी सैलजा की तारीफ करते हुए लिखा कि पार्टी में सच्चे नेताओं को भी प्रताड़ित किया जा रहा है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि संपत सिंह जल्द ही इनेलो (इंडियन नेशनल लोकदल) का दामन थाम सकते हैं। वे हाल ही में 25 सितंबर को रोहतक में हुई इनेलो की ताऊ देवीलाल जयंती रैली में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने अभय चौटाला की खुलकर प्रशंसा की थी।
संपत सिंह छह बार विधायक रह चुके हैं और दो बार हरियाणा के वित्त मंत्री भी रहे। वे हरियाणा को वैट लागू करने वाला पहला राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। राजनीति में उनकी पहचान एक कद्दावर, अनुभवी और साफ छवि वाले नेता के रूप में रही है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वह एक बार फिर अपने पुराने घर इनेलो की ओर लौटेंगे या नया राजनीतिक रास्ता अपनाएंगे।
