हरियाणा सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में नफे सिंह राठी मर्डर केस में जवाब दाखिल करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता राकेश कुमार और उसके परिवार को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जा चुकी है। कोर्ट ने याचिका का निपटारा किया।
हरियाणा सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पूर्व विधायक नफे सिंह राठी हत्या मामले को लेकर अपना जवाब दाखिल किया है। सरकार की ओर से कहा गया कि शिकायतकर्ता राकेश कुमार और उसके परिवार को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जा चुकी है।
25 फरवरी 2024 को हुई थी हत्या
जानकारी के अनुसार, 25 फरवरी 2024 को झज्जर जिले के बहादुरगढ़ में बराही रेलवे क्रॉसिंग पर चार बदमाशों ने इनलो नेता नफे सिंह राठी की एसयूवी पर गोलियां बरसाईं थीं। इस हमले में राठी और उनके एक साथी कार्यकर्ता की मौत हो गई थी, जबकि उनके तीन निजी सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे।
ड्राइवर की याचिका में लगाए गए आरोप
राठी के ड्राइवर राकेश कुमार, जो इस मामले में शिकायतकर्ता और प्रत्यक्षदर्शी दोनों हैं, ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि उन्हें और उनके परिवार को अतिरिक्त सुरक्षा दी जाए।
उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि उनकी सुरक्षा में रेवाड़ी जिला जेल के हेड वार्डन को शामिल किया जाए या पहले से तैनात किसी सुरक्षाकर्मी को बदला जाए।
एफआईआर में घटनाक्रम का विवरण
एफआईआर में कुमार ने बताया था कि एक सफेद कार उनकी गाड़ी का पीछा कर रही थी। उन्होंने बचने की कोशिश की, लेकिन बराही रेलवे क्रॉसिंग बंद होने के कारण रुकना पड़ा। तभी पांच हमलावरों ने गाड़ी से उतरकर उन पर गोलियां चला दीं।
सरकार ने दी दलील — सुरक्षा पहले से मुहैया

राज्य सरकार के वकील ने अदालत में कहा कि याचिकाकर्ता और उसके परिवार को पहले से ही पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की गई है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतिवादी संख्या 5 — जो जिला जेल में हेड वार्डन के पद पर कार्यरत हैं — को याचिकाकर्ता की सुरक्षा में नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि वे डीजीपी (कारागार) के अधीन हैं और याचिका में उन्हें पक्षकार नहीं बनाया गया है।
कोर्ट ने किया याचिका का निपटारा
न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया ने दलीलें सुनने के बाद कहा कि याचिकाकर्ता ने न तो तथ्यों पर विवाद किया है और न ही डीजीपी को पक्षकार बनाया है। इसलिए अदालत ने कहा कि इस स्तर पर आगे कोई आदेश देने की आवश्यकता नहीं है और याचिका का निपटारा किया जाता है।
कोर्ट ने किया याचिका का निपटारा
न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया ने दलीलें सुनने के बाद कहा कि याचिकाकर्ता ने न तो तथ्यों पर विवाद किया है और न ही डीजीपी को पक्षकार बनाया है। इसलिए अदालत ने कहा कि इस स्तर पर आगे कोई आदेश देने की आवश्यकता नहीं है और याचिका का निपटारा किया जाता है।
